कबाड़ में बदल रही लाखों की सामग्री, खंडहरों में चमचमाती एसी; बालोद स्वास्थ्य विभाग में ‘महाघोटाले’ का महाविस्फोट!
बालोद। जिला स्वास्थ्य विभाग इन दिनों मरीजों के इलाज के लिए नहीं, बल्कि सरकारी खजाने को चूना लगाने और भ्रष्टाचार के नए कीर्तिमान स्थापित करने के लिए चर्चा में है। विभाग में बिना आवश्यकता के लाखों रुपये की सामग्री की अनावश्यक खरीदी कर जनता की गाढ़ी कमाई का जमकर बंदरबांट किया गया है। आलम यह है कि पिछले वर्ष खरीदी गई लाखों की सामग्री आज उपयोग के अभाव में कबाड़ में तब्दील हो रही है, वहीं भ्रष्टाचार की भूख इस कदर हावी है कि एक खंडहर हो चुके भवन में भी चमचमाती हुई एसी (एयर कंडीशनर) ठोक दी गई है।

इस पूरे महाघोटाले के पुख्ता और पर्याप्त साक्ष्य ‘तहलका पत्रिका’ के पास मौजूद हैं, जिसका सिलसिलेवार खुलासा बहुत जल्द होने जा रहा है।
नियम-कायदे ताक पर, सिर्फ ‘गुडफेस’ के भरोसे लाखों का वारा-न्यारा:
स्वास्थ्य विभाग के भीतर चल रहा यह खेल किसी सरकारी प्रक्रिया के तहत नहीं, बल्कि अधिकारियों और चहेते ठेकेदारों के बीच आपसी “गुडफेस” (Under-the-table सांठगांठ) के आधार पर चल रहा है। ऊपर-ऊपर ही पूरी खरीदी की रूपरेखा तैयार की जाती है, बिल पास कराए जाते हैं और जनता की गाढ़ी कमाई से अधिकारी व ठेकेदारों की ‘बल्ले-बल्ले’ हो रही है।
अधिकारियों और ठेकेदारों की ‘बल्ले-बल्ले’, जनता का पैसा स्वाहा:
स्वास्थ्य विभाग में सामग्री क्रय करने का ऐसा ‘नशा’ चढ़ा कि नियमों और जमीनी आवश्यकताओं को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया। जरूरत से कई गुना अधिक सामग्री सिर्फ इसलिए खरीदी गई ताकि मोटे कमीशन का खेल खेला जा सके।

धरातल पर मरीजों को सुविधाएं मिलें न मिलें, लेकिन इस फिजूलखर्ची और मलाईदार बंदरबांट से भ्रष्ट अधिकारियों और चहेते ठेकेदारों की ‘बल्ले-बल्ले’ जरूर हो गई है। सरकारी विभागों की यह कथित खरीदी केवल कागजों को चमकाने और बिल पास कराने तक सीमित होकर रह गई है।
RTI के आवेदन से सहमे भ्रष्टाचारी, जानकारी मिलने से पहले ही ठेकेदारों के आने लगे फोन!
विभाग में पारदर्शिता की धज्जियां उड़ाने का सबसे बड़ा सबूत यह है कि जब इस पूरी खरीदी को लेकर सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जानकारी मांगी गई, तो विभाग में हड़कंप मच गया। हैरान करने वाली बात यह है कि लोक सूचना अधिकारी द्वारा आरटीआई की जानकारी आवेदक को उपलब्ध कराने से पहले ही, संबंधित ठेकेदारों के फोन आने शुरू हो जाते हैं। यह इस बात का सीधा प्रमाण है कि विभाग के भीतर बैठे जिम्मेदार अफसर और घोटालेबाज ठेकेदार आपस में मिले हुए हैं और आरटीआई के गोपनीय आवेदनों की जानकारी सीधे ठेकेदारों तक लीक की जा रही है।
प्रदेश स्तर से होगी उच्च स्तरीय जांच, हटेगा नकाब!
इस फर्जी खरीदी और महाघोटाले को लेकर ‘तहलका पत्रिका’ बेहद आक्रामक रुख अपनाने जा रही है। इस पूरे मामले को लेकर प्रदेश स्तर पर एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी का गठन कराया जाएगा।
मामले की गंभीरता और तहलका पत्रिका के पास मौजूद अकाट्य साक्ष्य के आधार पर शासन स्तर से इसकी बारीकी से स्क्रूटनी होगी।
बख्शे नहीं जाएंगे दोषी: 👇
इस महाघोटाले की आंच सीधे तौर पर विभाग के शीर्ष कर्ता-धर्ताओं तक पहुंचना तय है।
तहलका विशेष:
कागजों के हेरफेर और ‘गुडफेस’ की आड़ में छिपे भ्रष्टाचारियों के चेहरों से बहुत जल्द नकाब उठने वाला है। मामले की आंच विभाग के कई बड़े चेहरों तक पहुंचेगी। बने रहिए ‘तहलका पत्रिका’ के साथ, इस महाघोटाले के दस्तावेजों का पूरा एक्सक्लूसिव खुलासा अगली रिपोर्ट में…











