रात के अंधेरे में करोड़ों के नेशनल हाईवे पर भ्रष्टाचार की ‘डस्ट-पॉलिश’, सवाल पूछने पर NH इंजीनियर बोले- ‘काम होने दो, बाधा मत डालो’
मापदंडों को ठेंगा :
भारी वाहनों का बहाना बना अपनी नाकामी छुपा रहे जिम्मेदार;
घटिया निर्माण को ढकने स्ट्रीट लाइट जलवाकर रातों-रात कराई जा रही रिपेयरिंग, वीडियो-फोटो साक्ष्य आए सामने

बालोद।
जनता के टैक्स की गाढ़ी कमाई से बनने वाले नेशनल हाईवे (NH) की बदहाली और इसमें लिप्त भ्रष्टाचार का एक बेहद सनसनीखेज मामला बालोद जिले में सामने आया है। करोड़ों रुपए की लागत से तैयार हो रही नई सड़क बारिश शुरु होने से पहले व चंद दिनों के भीतर दम तोड़ने लगी है।

अपनी इसी तकनीकी विफलता और भ्रष्टाचार को छुपाने के लिए विभागीय इंजीनियरों द्वारा रात के अंधेरे में ‘लिपापोती’ (डस्ट-पॉलिश) का खेल खेला जा रहा है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जब सजग नागरिकों और मीडिया द्वारा इस संबंध में तकनीकी मापदंडों को लेकर सवाल पूछे जाते हैं, तो जिम्मेदार इंजीनियर सुधरने के बजाय सीधे ब्लैकमेलिंग का आरोप लगाने और धौंस चमकाने पर उतारू हैं।
इंजीनियर का गैर-जिम्मेदाराना जवाब: 👇
“बहुत आए और गए भ्रष्टाचार उजागर करने वाले”
जब निर्माण कार्य की गुणवत्ता, डामरीकरण की मोटाई और नियमों के उल्लंघन को लेकर एनएच के संबंधित इंजीनियर से जवाब मांगा गया, तो उनका रवैया बेहद गैर-जिम्मेदाराना और अवांछनीय रहा। इंजीनियर ने अहंकारपूर्वक लहजे में कहा कि “बहुत आए और चले गए भ्रष्टाचार को उजागर करने वाले।” इतना ही नहीं, अपनी तकनीकी कमियों को छुपाने के लिए उन्होंने सवाल पूछने वालों को डराते हुए कहा कि “क्या ब्लैकमेल करने आए हो? जो काम जैसा हो रहा है, उसे होने दो, कार्य में बाधा मत डालो।” एक लोक सेवक (Public Servant) का ऐसा बयान यह साफ दर्शाता है कि उन्हें न तो उच्च अधिकारियों का डर है और न ही शासन के नियमों का।

रात के अंधेरे में ही क्यों हो रही रिपेयरिंग?:
उठे गंभीर सवाल
नेशनल हाईवे अथॉरिटी और लोक निर्माण विभाग के नियमों के मुताबिक, किसी भी मुख्य मार्ग पर रिपेयरिंग या पैचवर्क का कार्य पर्याप्त विजिबिलिटी (उजाले) और उचित सुरक्षा संकेतों (Safety Signages) के साथ किया जाना चाहिए। लेकिन बालोद में नियम-कायदों को ताक पर रखकर रात के अंधेरे में स्ट्रीट लाइटें जलवाकर आनन-फानन में रिपेयरिंग का काम कराया जा रहा है।
अब सवाल यह उठता है कि जब रात के समय हाईवे पर सबसे ज्यादा भारी वाहनों का आवागमन रहता है, तब सुरक्षा को खतरे में डालकर यह कार्य क्यों कराया जा रहा है?
सवाल यह भी है कि क्या दिन के उजाले में भ्रष्टाचार की पोल खुलने का डर है, ? जिसके कारण रात के अंधेरे का सहारा लिया जा रहा है? उपलब्ध फोटो वीडियो व बयान साक्ष्य साफ बयां कर रहे हैं कि किस तरह नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

इंजीनियर का👇 हास्यास्पद तर्क:
अन्य प्रदेश के भारी वाहनों से डैमेज हो रही सड़क!
जब इंजीनियर से पूछा गया कि नई सड़क इतनी जल्दी क्यों उखड़ रही है, तो उन्होंने एक अजीबोगरीब और हास्यास्पद तर्क दिया। उनके मुताबिक, इस नेशनल हाईवे पर अन्य प्रदेश व अन्य जिले से आने वाले क्षमता से अधिक भारी वाहनों के चलने के कारण रोड डैमेज हो रही है।
यहाँ केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के नियमों के तहत सीधे कुछ बुनियादी सवाल खड़े होते हैं: 👇
मापदंड और डिजाइन क्षमता:
नेशनल हाईवे का निर्माण ‘एक्सल लोड’ (Axle Load) के कड़े अंतरराष्ट्रीय मापदंडों के आधार पर किया जाता है। क्या बालोद के इस हाईवे को बनाते समय भविष्य के ट्रैफिक और भारी वाहनों के दबाव का तकनीकी आकलन (Technical Assessment) नहीं किया गया था?

अंतरराज्यीय नियम: 👇
क्या बालोद के नेशनल हाईवे पर केवल छत्तीसगढ़ राज्य की गाड़ियों के चलने का नियम है?
क्या यह नियमतः संभव है कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर अन्य प्रदेशों के वाहनों के प्रवेश को प्रतिबंधित किया जाए?
नेशनल हाईवे का मतलब ही अंतरराज्यीय परिवहन को सुगम बनाना है। ऐसे में इंजीनियर का यह बयान केवल अपनी तकनीकी विफलता और गलत-सलत जानकारी देकर प्रशासन को गुमराह करने का एक असफल प्रयास है।
तहलका पत्रिका द्वारा दोषी इंजीनियर पर तत्काल निलंबन और उच्च स्तरीय जांच की मांग:
सड़क निर्माण में IRC (इंडियन रोड कांग्रेस) और MoRTH के दिशा-निर्देशों का खुला उल्लंघन किया गया है।
घटिया निर्माण सामग्री के उपयोग और जनता से दुर्व्यवहार के इस मामले में अब सीधे कार्रवाई की आवश्यकता है।
“तहलका पत्रिका” के द्वारा साक्ष्यों के आधार पर जिला प्रशासन, एनएचएआई (NHAI) के उच्च अधिकारियों और सतर्कता विभाग (Vigilance) से यह मांग की जाती है कि: 👇
संबंधित गैर-जिम्मेदार इंजीनियर को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए ताकि वह जांच को प्रभावित न कर सके।
जांच पूरी होने तक ठेकेदार के भुगतान (Payment Validation) पर तत्काल रोक लगाई जाए।
एक स्वतंत्र तकनीकी टीम (Technical Audit Team) गठित कर सड़क के कोर-कटिंग (Core Cutting) की जांच कराई जाए ताकि डामर की मोटाई और बेस की गुणवत्ता की असलियत सामने आ सके।
यदि इस खुली धांधली पर लगाम नहीं लगाई गई, तो यह न केवल राजस्व की भारी क्षति होगी, बल्कि भविष्य में किसी गंभीर सड़क दुर्घटना का कारण भी बन सकती है।











