बालोद : छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में कलेक्टर से अभद्र व्यवहार करना एक ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक को भारी पड़ गया. गुंडरदेही में राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों की समीक्षा बैठक के दौरान कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा के साथ अमर्यादित व्यवहार के आरोप में ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक यशवंत साहू को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है.
समीक्षा बैठक के दौरान हुआ विवाद
मिली जानकारी के मुताबिक गुंडरदेही में कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा की मौजूदगी में राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी. बैठक में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए. इस दौरान विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों की प्रगति और उपलब्धियों की समीक्षा की जा रही थी.
उप स्वास्थ्य केन्द्र चंदनबिरही की राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में कम उपलब्धि के बारे में स्वास्थ्य संस्था में पदस्थ यशवंत कुमार साहू ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक (पुरुष) से कलेक्टर ने जानकारी मांगी गई. इसी दौरान उन्होंने कलेक्टर के साथ अभद्र व्यवहार किया और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया.
जो शासकीय सेवक के पद की गरिमा के प्रतिकूल है तथा गंभीर अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है, यशवंत कुमार साहू का उक्त कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम 3 (1) (ii) में निहित शासकीय सेवक के ऐसे कार्य न करने के दायित्व का स्पष्ट उल्लंघन है. जो की शासकीय सेवक के लिए अशोभनीय है. उक्त कृत्य प्रथम दृष्टया गंभीर कदाचार एवं अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है.
CMHO ने जारी किया निलंबन आदेश
मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा ने संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए. इसके बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO), बालोद ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9 (1) (क) के तहत यशवंत साहू को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया.
निलंबन अवधि के दौरान यशवंत साहू का मुख्यालय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डौंडी निर्धारित किया गया है. उक्त अवधि में वे सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना मुख्यालय नहीं छोड़ेंगे एवं नियमानुसार उन्हे जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी. निलंबन अवधि में वे बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के अन्य कोई नियोजन, व्यवसाय, सेवा स्वीकार नहीं करेंगे. यशवंत कुमार साहू के विरुद्ध पृथक से विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही नियमानुसार की जाएगी. यह आदेश तत्काल प्रभावशील होगा.
इस कार्रवाई को प्रशासन द्वारा शासकीय बैठकों में अनुशासन बनाए रखने और अधिकारियों के साथ मर्यादित व्यवहार सुनिश्चित करने के लिए सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है. स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई के बाद प्रशासनिक अमले में भी चर्चा तेज हो गई है.












