भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा NH-930: पहली ही बारिश में खुली दावों की पोल, पानी निकासी के लिए तोड़े जा रहे डिवाइडर

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नेशनल हाईवे 930 के निर्माण कार्य में बरती गई भारी लापरवाही और गुणवत्ता से समझौते की कलई पहली बरसात में ही खुल गई है। जिस हाईवे से राहगीरों को सुगम और सुरक्षित सफर की उम्मीद थी, वह अब घटिया निर्माण और प्रशासनिक अनदेखी की वजह से हादसों का कारण बन चुका है.



​मानकों की उड़ाई गईं धज्जियां:

सड़क निर्माण के दौरान निर्धारित तकनीकी मापदंडों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया। ड्रेनेज (निकासी) की सही व्यवस्था न होने के कारण हल्की बारिश में ही पूरी सड़क जलमग्न हो रही है।

​जुगाड़ से पानी निकालने की नौबत:
हालात इस कदर बदतर हो चुके हैं कि कई स्थानों पर सड़क और बने-बनाए डिवाइडर को तोड़कर पानी की निकासी कराई जा रही है। करोड़ों की लागत से बनी सार्वजनिक संपत्ति को खुद जिम्मेदार ही नष्ट करने पर आमादा हैं.

​दुर्घटनाओं को सीधा आमंत्रण:

जलभराव और टूटे हुए डिवाइडरों की वजह से वाहन चालकों के लिए सफर जोखिम भरा हो गया है। सड़क की खस्ताहाली और जलजमाव साफ बयां कर रहे हैं कि निर्माण में बड़े पैमाने पर वित्तीय व तकनीकी गड़बड़ी हुई है.

लापरवाही पूर्वक किये गये कार्य के साथ जनहित में बेहतरी:

​दुल्हन की हल्दी की तरह धुली नई-नवेली नेशनल हाईवे 930 की सड़क:

पहली ही बारिश में उधड़ने लगी परतें
​जिस नेशनल हाईवे 930 (NH-930) के निर्माण को क्षेत्र के विकास और सुगम आवागमन का आधार बताया जा रहा था, उसकी हकीकत पहली ही बारिश ने छीलकर रख दी है। शादी के बाद दुल्हन की हल्दी की तरह चमकने वाली यह नई-नवेली सड़क चंद दिनों में ही अपनी बदहाली बयां करने लगी है।

​सड़क पर जगह-जगह आई दरारें और बने बड़े-बड़े गड्ढे अब राहगीरों के लिए हादसों का कारण बन रहे हैं। विभाग की कार्यप्रणाली ऐसी है कि निर्माण की कमियों को छुपाने के लिए “फेसियल” और “धूप-पालिश” का काम प्रगति पर है।
सड़क के जख्मों पर बीटाडिन तो काम नहीं आएगा, इसलिए सिलकोड (Bitumen/Emulsion) की मलहम-पट्टी का दौर शुरू कर दिया गया है।

​तस्वीरें साफ बयां कर रही हैं कि निर्माण कार्य किस मापदंड पर किया गया है। गुणवत्ता को ताक पर रखकर किए गए इस कार्य ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:

​रोड निर्माण में अनियमितता: डामरीकरण और बेस की गुणवत्ता कमजोर होने के कारण सड़क बनते ही उधड़ने लगी है।

​नाली निर्माण में गड़बड़ी: जल निकासी के लिए बनाई गई नालियों का सही एलाइनमेंट नहीं किया गया है।

​स्ट्रीट लाइट के पोल स्थापना में लापरवाही:
पोलों की फिटिंग और सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई है।

रोड और नाली की ऊँचाई का असंतुलन:
सड़क और नाली के स्तर में भारी अंतर होने से सड़कों पर पानी भरने का खतरा बढ़ गया है।
​नाली के चैंबर (ढक्कन) की दुर्दशा:
घटिया चैंबर ढक्कन लगाए गए हैं, जो कभी भी किसी बड़े हादसे का सबब बन सकते हैं।
​सीमेंट पाइप बिछाने में लापरवाही: नाली निर्माण के दौरान सही साइज और गुणवत्ता के सीमेंट पाइप नहीं डाले गए।

​निर्माण और तोड़-फोड़ का खेल:
एक ही काम को बार-बार बनाकर तोड़ने और सुधारने के नाम पर बजट की बर्बादी की जा रही है।

​जनता की कमाई पर भर्राशाही का खेल:
​आखिर इस निर्माण कार्य का वास्तविक मकसद क्या है? क्या इतनी बड़ी गड़बड़ियों के बावजूद भी जनता मूकबधिर बनी रहे और अपनी जान जोखिम में डालकर सफर करे?
आम जनता के खून-पसीने की कमाई और सरकार के राजस्व का इस तरह दुरुपयोग कब तक चलता रहेगा?

​आज NH-930 का यह निर्माण कार्य सैकड़ों सवालों के घेरे में आ चुका है। शासन-प्रशासन और संबंधित तकनीकी टीम को तत्काल इस मामले को संज्ञान में लेकर निर्माण की उच्चस्तरीय जाँच करानी चाहिए, ताकि जनहित में सड़क की गुणवत्ता सुधारी जा सके और भ्रष्टाचार में लिप्त जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई हो सके।

बड़ा सवाल:
करोड़ों रुपये के इस प्रोजेक्ट में गुणवत्ता निगरानी की जिम्मेदारी किसकी थी? क्या ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों की सांठगांठ के कारण यह निर्माण भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा है?

​शासन और उच्चाधिकारियों को तत्काल इस मामले का संज्ञान लेकर जांच टीम गठित करनी चाहिए। घटिया निर्माण कराने वाली एजेंसी और लापरवाही बरतने वाले अफसरों पर कड़ी कार्रवाई तथा सड़क की तत्काल मरम्मत सुनिश्चित की जानी आवश्यक है

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