सलाखें रोक नहीं पाईं रिश्तों की डोर, चारदीवारी के भीतर छलका अटूट रिश्तों का सैलाब, नम आखों से बहनों ने भाइयों की कलाई पर सजाई राखी

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गरियाबंद : रक्षाबंधन के पावन पर्व पर गरियाबंद उप जेल में उस वक्त माहौल भावुक हो गया, जब दूर-दराज से पहुंचीं बहनों ने अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनके सुखद और सुरक्षित जीवन की कामना की. जेल की चारदीवारी के भीतर भाई-बहन के प्रेम का यह नजारा बेहद भावनात्मक नजर आया. किसी की आंखों में खुशी थी तो किसी की आंखों में अपनों से दूर रहने का दर्द…
आज सुबह 9 बजे से ही राखी बांधने के लिए बहनों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था. दूर-दराज से आने वाली बहनों की सुविधा को देखते हुए उप जेल प्रबंधन द्वारा विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं. ताकि वे बिना किसी परेशानी के अपने भाइयों से मिलकर उन्हें राखी बांध सकें.
एक-एक कर भाइयों की कलाई पर सजा प्रेम का धागा
रक्षाबंधन के दौरान उप जेल में एक-एक कर बहनें अपने भाइयों से मिलीं. बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी. तिलक लगाया और उनकी लंबी उम्र की कामना की. कई भावुक पलों में बहनें अपने आंसू नहीं रोक सकीं. वहीं भाइयों के चेहरों पर भी अपनों से मिलने की खुशी साफ दिखाई दी.
समाचार लिखे जाने तक लगभग 50 बंदियों को 175 बहनों ने राखी बांधी. इस दौरान जेल प्रबंधन की ओर से मुलाकात और राखी बांधने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गईं.
जेल प्रबंधन ने की विशेष व्यवस्था
रक्षाबंधन जैसे महत्वपूर्ण पारिवारिक पर्व पर जेल प्रबंधन का प्रयास रहा कि बंदियों और उनके परिजनों को भावनात्मक जुड़ाव का अवसर मिले. विशेषकर दूर-दराज से आने वाली बहनों के लिए व्यवस्थाएं की गईं. ताकि वे अपने भाइयों से मिलकर रक्षाबंधन का पर्व मना सकें. उप जेल गरियाबंद की इस पूरी व्यवस्था में जेलर रवि भुआर्य के साथ भरत दीवान, वीरेंद्र बांधे और प्रमोद राव सहित जेल प्रबंधन की टीम सक्रिय रही.
जेलर रवि भुआर्य ने कहा
“रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम और भावनाओं से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। जेल में बंद व्यक्ति भी किसी का भाई, बेटा या परिवार का सदस्य है. हमारा प्रयास रहा कि रक्षाबंधन के अवसर पर बहनों को अपने भाइयों से मिलने और उनकी कलाई पर राखी बांधने में किसी तरह की परेशानी न हो. दूर-दराज से आने वाली बहनों के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गईं. आज यहां भाई-बहन के बीच प्रेम और भावनाओं के बेहद मार्मिक दृश्य देखने को मिले.”

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