वन मंडल मुखिया को पद से हटाने की उठ रही मांग।

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वन मंडल मुखिया को हटाने की उठ रही मांग

 

सत्र 2021 व 2022 तेंदूपत्ता बोनस वितरण में प्रबंधकों व अधिकारियों की मिलीभगत से 6.54 करोड़ की राशि की शिकायत उपरांत मामले में विभागीय जांच शुरू हो गई है उक्त जांच के लिए कमेटी गठन की गई है जिसमें जांच कमेटी अध्यक्ष वनमण्डलाधिकारी जगदलपुर श्री उत्तम गुप्ता की अध्यक्षता में 2 एसडीओ, 1 रेंजर, 2 फॉरेस्टर कुल 5सदस्यीय जांच दल के द्वारा मामले की जांच करने घोर नक्सल क्षेत्रों में पहुंच कर बयानों का सिलसिला जारी किया गया है वहीं जिला प्रशासन सुकमा के एडीएम श्री गजेंद्र ठाकुर ने भी मामले से जुड़े संबंधितों को नोटिस जारी कर जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई है परन्तु प्रशासन द्वारा जांच की कोई प्रतिक्रिया अभी तक स्पष्ट नही हो पायी है।

 

 

*निष्पक्ष जांच पूर्ण होते तक वनमंडल सुकमा के मुखिया को हटाया जाना उचित होता*

 

 पूर्व में भी ऐसी कई शिकायतें व जांच सुनने व देखने मिली हैं जिसमें जांच से पूर्व संबंधितों को उनके मूल पद से हटा कर ही जांच की गई तभी कहीं जांच में पारदर्शिता एवं निष्पक्षता से जांच हो पाती है और यह संभावना खत्म हो जाती है कि जांच में किसी प्रकार से प्रभावित नही होगी, परन्तु वन मंडल सुकमा के अंतर्गत हुए करोड़ों रुपये के गबन के जांच में ऐसा कुछ देखने या सुनने को नही मिला यह भी एक विचारणीय एवं शंका को जन्म देता है।

 

उक्त गबन की शिकायत के उपरांत सुकमा के जिलाधीश महोदय द्वारा तेंदूपत्ता बोनस वितरण में अनियमितताएं के मामले में एडीएम और डीएफओ को जांच के निर्देशित किया गया था परंतु उक्त विषय पर जिस वनमंडल में भ्रष्टाचार , फर्जीवाड़ा , गबन के संबंध में शिकायत उपरांत जांच कमेटी गठन कर जांच प्रारंभ की जाती है तो सर्वप्रथम गबन के मामले में लिप्त अधिकारी, कर्मचारी को उनके मूल पद से हटा कर निष्पक्ष जांच कराई जाती है ताकि जांच प्रभावित न हो व निष्पक्ष जांच हो सके परन्तु वनमंडल सुकमा के अंतर्गत करोड़ो रूपये के बोनस राशि में गबन के मामले में आज दिनांक तक वनमंडल मुखिया एवं उक्त गबन से संबंधित लोगों को उनके मूल पद पर ही रखा गया है जो कि समझ से परे है।

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