सुकमा वन मंडल अंतर्गत हुए करोडों रुपये के बोनस गबन की जांच करने पहुंची जांच टीम
गोलापल्ली पालाचलमा समिति में नही बंटा संग्रहको को बोनस
कोंटा बस्तर के आदिवासियों को आर्थिक और सामाजिक रुप से मजबूत करने सरकार हर साल नई योजनायें बनाती हैं और उस पर करोडों रुपये खर्च करती है इसके बावजूद सरकारी मंचों से इस बात का दावा किया जाता है कि सरकारी योजनाओं का लाभ प्रदेश का अंतिम व्यक्ति भी नही उठा रहा है लेकिन दावों के बीच जमीनी हकीकत पड़ताल करने की जहमत न ही संबंधित विभाग के अधिकारी उठाते हैं न ही सरकार में बैठे जिम्मेदार
योजनाएं प्रदेश की राजधानी से तो शुरू होती है लेकिन बस्तर के बीहड़ो तक पहुंचने से पहले ही कहीं गुम हो जाती है ऐसी ही सरकार की योजनाओं में एक अति महत्वपूर्ण योजना तेंदूपत्ता बोनस राशि जो गरीब संग्रहको के जीवनयापन का एक प्रमुख साधन है।
नक्सलवाद के आड़ में सालों से वन समिति प्रंबधक आदिवासी के मेहनताने पर डाल रहे डाका।
तेंदूपत्ता बोनस राशि में गबन का मामला प्रकाश मे आने के बाद जमीनी हकीकत जानने कोंटा के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पहुच कर मामले की पड़ताल की गई तो इस दौरान इस बात का खुलासा हुआ की नक्सलग्रस्त क्षेत्रों में घोटाले की जड़ और भी गहरी है।
यहां नक्सलियों की मौजूदगी का फायदा उठा कर वन विभाग के अधिकारी और प्रबंधक मिलकर सालों से संग्रहको की मेहनत पर डाका डाल रहे हैं प्राथमिक वन समिति गोल्लापल्ली और पालाचलमा में सालो से तेंदूपत्ता बोनस की राशि बांटी ही नही गई है हर साल तेंदूपत्ता सीजन में ग्रामीण बढ़चढ़ कर हिस्सा लेते हैं लक्ष्य से अधिक पत्ता तोड़ने पर सरकार संग्रहको को बोनस के तौर पर इनाम राशि देती है यही इनाम राशि को वन अफसर समिति प्रबंधक सालों से पाकेट मनी की तरह इस्तेमाल करते आ रहे हैं सुरक्षा कारणों से नाम नही छापने की शर्त पर ग्रामीणों ने बताया की तेंदूपत्ता तोड़ाई का पैसा ही सरकार से मिलता है पर बोनस की राशि आज तक नही मिली है। पुछने पर हर बार प्रबंधक मना कर देता है नक्सल ईलाका होने की वजह से विभागीय जानकारी भी नही मिलती है।
गोल्लापल्ली और पालाचलमा में करोड़ों का बोनस प्राप्त
विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार गोल्लापल्ली और पालाचलमा वन समिति में दो साल 2021-2022 का तेंदूपत्ता बोनस राशि प्राप्त हुआ प्रबंधको द्वारा संग्रहको को गुमराह करते हुए 2021 का ही बोनस वितरण किया जा रहा है बीते साल 2024 के अप्रैल मई महीने में 1.50 करोड रुपये बोनस की राशि दोनों वन समितियों के खाते में ट्रांसफर किया गया है लेकिन दस माह बीत जाने के बाद भी संग्रहको को राशि का वितरण नही किया गया हो।
बताया जा रहा है कि प्रबंधको ने बोनस की पूरी राशि आहरण भी कर ली है पालाचलमा समिति के दुब्बामरका और सालोतोंग गांव के ग्रामीणों का कहना है की बोनस की राशि तो कभी नही मिली है लेकिन पिछले साल सरकारी समर्थन राशि चार हजार रुपए प्राप्त हूए हैं वही ठेकेदार द्वारा दिये जाने वाला 15 सौ आजतक नही मिला है पालाचलमा और गोलापल्ली की समितियों में बीते साल राजनांदगांव के पत्ता ठेकेदार ने ठेका लिया था खरीदी के बाद शेष राशि देने की बात की थी परन्तु आजतक नही मिला।
बोनस के खेल में फर्जी अंगुठे का कमाल प्रबंधक मालामाल
तेंदूपत्ता बोनस वितरण में बड़ा फर्जीवाड़ा किया जा रहा है गरीब संग्रहको की अज्ञानता और निरक्षरता का फायदा वन समिति प्रबंधक जम कर उठा रहे हैं जांच पड़ताल के दौरान इस बात की जानकारी मिली कि उन्हें कितनी राशि बोनस के रुप में प्राप्त हुई है वही फर्जी अंगुठा लगा कर किसी की राशि को किसी को बांटा जा रहा है उक्त जानकारी नाम न छापने की शर्त पर ग्रामीणों ने बताई।
जांच टीम पहुंची संग्रहको का लिया जा रहा बयान
तेंदूपत्ता बोनस में लगातार मिल रही शिकायत के बाद गुरुवार को जांच टीम गोलापल्ली पल्ली रेंज के वन समितियों में पहुंची जांच टीम में दो sdo पूरे मामले की छानबीन कर जांच कर रहे हैं। अब देखना ये है की उक्त जांच टीम कितनी ईमानदारी और निष्पक्षता से जांच करती है।
बता दे की पूर्व विधायक मनीष कुंजाम ने तेंदूपत्ता बोनस राशि को गबन किये जाने का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच के लिए कलेक्टर से मांग की थी।








