भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा NH-930: पहली ही बारिश में उखड़ा डामर, ‘डांस’ करते स्ट्रीट पोल और 1.5 फीट ऊंची नाली ने खोली इंजीनियरों की पोल!
बालोद। विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच करोड़ों की लागत से तैयार नेशनल हाईवे 930 (NH-930) पहली ही मानसूनी बारिश में ताश के पत्तों की तरह बिखर गया है। निर्माण में बरती गई घोर लापरवाही और फर्जीवाड़े का आलम यह है कि जिम्मेदार इंजीनियर अब अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए बेतुके बहाने बना रहे हैं। ‘तहलका पत्रिका’ की खोजी पड़ताल में इस राष्ट्रीय राजमार्ग पर तकनीकी अनभिज्ञता और भ्रष्टाचार का एक ऐसा कॉकटेल देखने को मिला है, जिसने सीधे भारत सरकार के उपक्रम भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जमीनी हकीकत और उपलब्ध तस्वीरें इस महाघोटाले की गवाही खुद दे रही हैं।
तीखी सुर्खियां: जो बयां कर रही हैं भ्रष्टाचार का पूरा खेल
पहली बारिश भी नहीं झेल पाया करोड़ों का नेशनल हाईवे: NH-930 पर डामर बहा, सिर्फ मिट्टी बची!




इंजीनियरों की अजीब दलील: खुद का घटिया निर्माण छुपाने के लिए ‘भारी वाहनों’ के सिर मढ़ा ठीकरा!
अजब-गजब इंजीनियरिंग: सड़क से डेढ़ फीट ऊंची बना दी नाली, पानी निकलने के बजाय सड़क बन रही तालाब!








हवा चलते ही ‘डांस’ करने लगे स्ट्रीट पोल: आनन-फानन में कंक्रीट डालकर दबाया गया सच!

रखरखाव के नाम पर शून्य: नेशनल हाईवे के बीचों-बीच उगे कटीले पेड़ दे रहे हादसों को न्योता!






रातोंरात की गई रिपेयरिंग फेल, बहानेबाजी में जुटे इंजीनियर
दो दिन पहले ही जब सड़क की गिट्टियां उखड़ने लगीं, तो विभाग के इंजीनियरों ने आनन-फानन में रातोंरात पैचवर्क और रिपेयरिंग करवाकर अपनी विफलता को छुपाने की कोशिश की। लेकिन प्रकृति ने चंद घंटों की बारिश में ही इस लीपापोती को धो डाला। आज स्थिति यह है कि वह रिपेयरिंग पूरी तरह छिल चुकी है और सड़क पर सिर्फ मिट्टी नजर आ रही है।
जब इस बदहाली पर सवाल उठे, तो जिम्मेदार इंजीनियर अपनी गर्दन बचाने के लिए भारी वाहनों के आवागमन को इसका कारण बताने लगे। सवाल यह उठता है कि क्या नेशनल हाईवे जैसी महत्वपूर्ण सड़क को केवल साइकिल और दोपहिया वाहनों के लिए डिजाइन किया गया था? भारी वाहनों का भार न झेल पाना ही यह साबित करता है कि निर्माण सामग्री में बड़े पैमाने पर धांधली हुई है और बेस (आधार) पूरी तरह कमजोर है।
अजब-गजब इंजीनियरिंग: नाली 1.5 फीट ऊंची, पोल हुए खोखले
सड़क निर्माण की तकनीकी समझ पर सबसे बड़ा तमाचा यहाँ का ड्रेनेज सिस्टम है। तस्वीरें साफ दिखाती हैं कि नाली को मुख्य सड़क से करीब एक से डेढ़ फीट ऊपर बना दिया गया है। ऐसे में सड़क का पानी नाली में कैसे जाएगा, यह समझने में अच्छे-भले विशेषज्ञ भी फेल हैं।
यही नहीं, मार्ग पर लगाए गए स्ट्रीट पोल के बेस में इतनी कम सामग्री डाली गई थी कि वे हल्की हवा में ही हिलने (डांस करने) लगे थे। पोल गिरने के डर और बदनामी से बचने के लिए अब आनन-फानन में उनके नीचे कंक्रीट का थक्का जमाया जा रहा है। हद तो तब हो गई जब सड़क के ऊपर ही बड़े-बड़े कटीले पेड़-पौधे उग आए हैं, जिससे साफ है कि इसके रखरखाव और देखरेख के नाम पर सिर्फ कागजी घोड़े दौड़ाए जा रहे हैं।
‘तहलका पत्रिका’ के चिन्हांकित क्षेत्रों पर होगी विशेष जांच
इस पूरे प्रोजेक्ट में पैसे को पानी की तरह बहाकर फर्जीवाड़ा किया गया है। ‘तहलका पत्रिका’ ने इस पूरे मार्ग पर जिन विशिष्ट और संवेदनशील क्षेत्रों को चिन्हित किया है, वहां अब एक बड़े स्तर की विशेष जांच होने जा रही है।
चूंकि NHAI (भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अधीन देश की सर्वोच्च संस्था है, इसलिए यह मामला अब दिल्ली तक गूंजने लगा है। केंद्रीय स्तर पर पहुंच रही इन शिकायतों और अचूक तस्वीरों के सबूतों के बाद, तकनीकी जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य और इंजीनियर-ठेकेदार गठजोड़ का पर्दाफाश होना तय है।
तस्वीरें बोलती हैं: अंधेरे में किया गया घटिया काम उजाला होते ही बह गया। नाली की ऊंचाई, धंसती सड़क और हिलते पोल चीख-चीख कर कह रहे हैं कि जनता की गाढ़ी कमाई को किस तरह भ्रष्टाचार के गड्ढे में धकेल दिया गया।











