बालोद वन मंडल का पर्यावरण पार्क महाघोटाला, ‘तहलका पत्रिका’ की मुहिम से वन विभाग में मचा हड़कंप, जांच दबाने की कोशिशों के बीच उच्च स्तर से फूटा गुस्सा

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बालोद : ​लांछन लगाने वाले और ‘विशेषज्ञ’ कान खोलकर सुन लें- न वन विभाग में ‘तहलका पत्रिका’ की हरियाली खत्म हुई है. न हम किसी और विभाग की तरफ रुख कर रहे हैं. हमारी पैनी नजर भ्रष्टाचार के हर उस पन्ने पर है. जिसे दबाने की साजिश रची जा रही है!.


शीर्ष नेतृत्व के हंटर से और विक्राल हुई जांच, DFO बालोद की ढर्रेबाज़ी पर वरिष्ठ कार्यालय सख्त
वन मंडल बालोद के अंतर्गत पर्यावरण पार्क (RF-98, 20 हेक्टेयर) में हुए करोड़ों रुपये के निर्माण भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े की फाइलें अब बंद होने के बजाय और तेजी से खुलने लगी हैं.
‘तहलका पत्रिका’ द्वारा उजागर किए गए इस महाघोटाले पर अब मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) और वन विभाग के शीर्ष अधिकारियों ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है.
मुख्य वन संरक्षक, क्षेत्रीय कार्यालय दुर्ग को साफ शब्दों में निर्देशित किया गया है कि वे तत्काल एक निष्पक्ष और स्पष्ट जांच प्रतिवेदन उच्च कार्यालय को प्रेषित करें.
​इस पूरे मामले में सबसे शर्मनाक रवैया वन मंडलाधिकारी (DFO) बालोद का रहा है. जिनके द्वारा तय समयावधि के भीतर जांच रिपोर्ट वरिष्ठ कार्यालय को नहीं भेजी गई.
विभाग की इस जानबूझकर की जा रही लेटलतीफी और कछुआ चाल पर कड़ा आक्रोश जताते हुए वरिष्ठ स्तर से तत्काल निष्पक्ष जांच पूरी कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के पुनः कड़े निर्देश जारी किए गए हैं.


तारीख-दर-तारीख जारी रिमाइंडर्स खोल रहे अफसरों की लापरवाही की पोल
​उच्च अधिकारियों द्वारा लगातार जारी किए जा रहे पत्र यह साबित करने के लिए काफी हैं कि मामला दबाने की कोशिशें नाकाम हो चुकी हैं.
​अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (सतर्कता/शिकायत): इनके द्वारा जनदर्शन टोकन क्रमांक 2111625004080 के तहत क्षेत्रीय कार्यालय को पत्र क्रमांक/pubr-4001/586/phn/2026forest HQ/538882 (दिनांक 10/06/2026) जारी कर कड़ा रुख अपनाया गया है.


​मुख्य वन संरक्षक (क्षेत्रीय कार्यालय दुर्ग): इस कड़े निर्देशन के बाद दुर्ग कार्यालय ने वन मंडलाधिकारी बालोद की नींद उड़ाने वाले बैक-टू-बैक पत्र जारी किए हैं. इसमें पत्र क्रमांक/PUBR/40/12/2026 PA/751 (दिनांक 28/01/2026), क्रमांक 3950 (दिनांक 08/06/2026) और हालिया पत्र क्रमांक/PUBR/40/12/2026 PA/4209 दुर्ग (दिनांक 19/06/2026) शामिल हैं. इन सभी पत्रों के माध्यम से बालोद DFO को दो टूक आदेश दिया गया है कि वे तत्काल निष्पक्ष जांच प्रतिवेदन भेजें ताकि वरिष्ठ कार्यालय को सही रिपोर्ट सौंपी जा सके.


तीखा पलटवार: 👇
लांछन लगाने वाले और कथित ‘शुभचिंतक’ अपनी गलतफहमी दूर कर लें!
‘तहलका पत्रिका’ का सीधा और बेबाक जवाब:👇
इस बीच, कुछ भ्रष्टाचारियों के पाले हुए तत्वों और सोशल मीडिया के कथित ‘शुभचिंतकों’ द्वारा यह भ्रामक दुष्प्रचार किया जा रहा है कि विभाग की देरी की वजह से ‘तहलका पत्रिका’ ने मामले को रफा-दफा कर दिया है. कुछ लोग तो यहां तक टिप्पणी कर रहे हैं कि “वन विभाग में तहलका की हरियाली (असर) खत्म हो गई है. इसलिए अब पत्रिका अन्य विभागों की ओर रुख कर रही है.”
ऐसे लांछन लगाने वाले और अफवाहबाजों को ‘तहलका पत्रिका’ कड़े शब्दों में चेतावनी देती है कि वे अपनी आँखों से मोतियाबिंद का चश्मा हटा लें.
‘तहलका’ की खोजी पत्रकारिता किसी सरकारी बाबू की लेटलतीफी से न तो सुस्त होती है और न ही अपनी धार खोती है. जब हमने इस महाघोटाले को उठाया था, तब माननीय प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) नई दिल्ली, माननीय राज्यपाल, माननीय मुख्यमंत्री, माननीय वन मंत्री और मुख्य सचिव (वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग) तक को तस्वीरों और दस्तावेजी सबूतों के साथ लिखित शिकायत भेजी थी.
आज उसी का परिणाम है कि पूरी प्रशासनिक मशीनरी जवाब देते नहीं बन रही है.
​रही बात अन्य विभागों की ओर रुख करने की, तो ‘तहलका पत्रिका’ का काम जनता के पैसे की लूट को हर जगह उजागर करना है. वन विभाग के इस घोटाले की जड़ें इतनी गहरी हैं कि जब तक इसके दोषियों को सलाखों के पीछे नहीं पहुंचा दिया जाता, तब तक ‘तहलका’ चैन से नहीं बैठने वाला.


विभाग की लेटलतीफी भ्रष्ट अफसरों की नाकामी को दर्शाती है. हमारी कमजोरी को नहीं. ‘तहलका’ की हरियाली पहले से और ज्यादा घनी और विक्राल हो चुकी है. जो बहुत जल्द इस घोटाले के बबूलों को साफ करेगी.
​जांच की आंच अब अंतिम चरण में है. दूध का दूध और पानी का पानी होना तय है. ‘तहलका’ की पैनी नजर हर एक शासकीय दस्तावेज और भ्रष्टाचारियों की हर एक चाल टिपा टिप्पणी करने वालों पर मजबूती से टिकी हुई है.

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