तहलका पत्रिका ग्राउंड रिपोर्ट
विशेष संवाददाता, बालोद
🛑 करोड़ों की राशि का ‘बंदरबांट’:
नेशनल हाईवे 930 पर नाली नहीं, भ्रष्टाचार का ‘कालचक्र’ निर्मित!
➔ रो-रोकर बदहाली बयां कर रहीं तस्वीरें; इंजीनियर की ‘डिग्री’ पर उठे सवाल, अब सुंदर बालोद की उम्मीदें जिला प्रशासन की त्वरित कार्रवाई पर टिकीं
बालोद : विकास के नाम पर सरकारी खजाने को किस तरह चूना लगाया जाता है. और जनता की गाढ़ी कमाई का कैसे ‘बंदरबांट’ किया जाता है. इसका जीवंत और शर्मनाक उदाहरण नेशनल हाईवे 930 (NH-930) पर देखने को मिल रहा है. हाईवे के किनारे बनाई गई नाली तकनीकी सूझबूझ का नहीं, बल्कि खुलेआम गैर-जिम्मेदाराना रवैये और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है.
आज जब ‘तहलका पत्रिका’ की टीम ने धरातल पर उतरकर इस निर्माण कार्य का बारीकी से भ्रमण किया, तो ऐसे चौंकाने वाले तथ्य और तस्वीरें सामने आईं. जिन्हें देखकर कोई भी आम नागरिक कह उठेगा—

“बाप रे! क्या गजब का भ्रष्टाचार है, न गुणवत्ता का ठिकाना है और न साफ-सफाई का!”
📉 न गुणवत्ता, न कोई मापदंड: कहीं आसमान पर, तो कहीं पाताल में नाली!
तहलका पत्रिका के कैमरे में कैद हुई तस्वीरें चिल्ला-चिल्लाकर निर्माण के घटिया स्तर की कहानी बयां कर रही हैं. तकनीकी मापदंडों को ताक पर रखकर किए गए इस निर्माण में लापरवाही की सारी हदें पार कर दी गई हैं:
ऊपर-नीचे का अजीब खेल:
नाली का लेवल कहीं बहुत ज्यादा ऊपर कर दिया गया है. तो कहीं अचानक नीचे। बिना किसी ढाल और मापदंड के बनाई गई यह नाली पानी निकासी के बजाय जलभराव का कारण बनने वाली है.
इंजीनियरिंग का ‘अजूबा’:
इस गजब के निर्माण को देखकर ऐसा लगता है कि मानो किसी नौसिखिए से काम कराया गया हो. नाली निर्माण में तकनीकी रूप से इतनी बड़ी चूक हुई है कि अब स्थानीय जानकारों और प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि इस पूरे प्रोजेक्ट को देखने वाले इंजीनियर की डिग्री की भी जांच होनी चाहिए.

कांक्रीट और पाइप का ‘अधूरा’ कॉकटेल:
ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों की जुगलबंदी का आलम यह है कि नाली को कहीं कांक्रीट से बनाया गया, तो कहीं सिर्फ पाइप डालकर आधा-अधूरा ही छोड़ दिया गया है। काम में निरंतरता गायब है.
🕳️ अधूरा काम, खुला ‘डेथ ट्रैप’: दुर्घटनाओं को सीधा निमंत्रण
यह नाली केवल भ्रष्टाचार का स्मारक नहीं है, बल्कि राहगीरों के लिए मौत का कुआं साबित हो रही है:
चेंबर बिना ढक्कन के गायब:
पूरी नाली निर्माण के दौरान सैकड़ों की संख्या में ऐसे चेंबर हैं, जिन पर ढक्कन (कैप) लगाया ही नहीं गया है। नेशनल हाईवे जैसी व्यस्त सड़क के किनारे खुले पड़े ये चेंबर किसी भी वक्त बड़ी दुर्घटना को अंजाम दे सकते हैं.
NH-930 का यह नाली निर्माण पूरी तरह फेल साबित होकर दुर्घटनाओं को खुला निमंत्रण दे रहा है.

🏛️ जिला प्रशासन से आमजन की उम्मीदें:
‘सुंदर बालोद’ की छवि पर न लगे दाग
वर्तमान में जिला प्रशासन की कार्यशैली से आम जनता काफी खुश है और लोगों में प्रशासन के प्रति एक गहरा विश्वास है. यही वजह है कि अब आमजन की उम्मीदें नेशनल हाईवे के इस निर्माण कार्य की गुणवत्ता और जिले की छवि को लेकर सीधे जिला प्रशासन पर टिक गई हैं.
हर नागरिक चाहता है कि बालोद एक आदर्श और सुंदर जिला बने, लेकिन ऐसे गैर-जिम्मेदाराना निर्माण कार्य ‘सुंदर बालोद’ की परिकल्पना को धूमिल कर रहे हैं। जनता को पूरा भरोसा है कि जिला प्रशासन इस मामले को त्वरित संज्ञान में लेगा और जनहित को सर्वोपरि रखते हुए लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदारों पर कड़ी लगाम कसेगा.

”तहलका पत्रिका की चुभती बात”
करोड़ों रुपए के इस प्रोजेक्ट में न तो गुणवत्ता का ध्यान रखा गया और न ही जनता की सुरक्षा का। क्या जिला प्रशासन और विभाग के उच्च अधिकारी इस खुलेआम हो रहे भ्रष्टाचार पर अपनी आंखें मूंद कर बैठे रहेंगे, या फिर जिम्मेदार ठेकेदार और लापरवाह इंजीनियर पर कोई ठोस और दंडात्मक कार्रवाई होगी?
‘सुंदर बालोद’ के निर्माण के लिए इस भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना बेहद जरूरी है. जनता अब कार्रवाई का इंतजार कर रही है….











