तहलका पत्रिका की खोजी रिपोर्ट: स्वास्थ्य विभाग में महाघोटाला:
जेम पोर्टल बना ‘कमाना’ पोर्टल:
₹20 का सामान ₹200 में खरीदा, स्वास्थ्य विभाग में क्रय भंडार नियमों की उड़ीं धज्जियां
विशेष संवाददाता:
राज्य के स्वास्थ्य विभाग में सरकारी बजट को ठिकाने लगाने का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।
केंद्र और राज्य सरकार से स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करने के लिए मिले करोड़ों रुपये के बजट का विभागीय अधिकारियों और चहेते सप्लायरों ने मिलकर ‘बंदरबांट’ करने का बीडा उठा लिया है।
“तहलका पत्रिका” के पास मौजूद पुख्ता दस्तावेज इस बात की गवाही दे रहे हैं कि विभाग में खरीदी के नाम पर भ्रष्टाचार का ऐसा तांडव मचा है, जिसका खुलासा बहुत जल्द सिलसिलेवार ढंग से किया जाएगा।
भ्रष्टाचार की ‘क्रोनोलॉजी’:
ऐसे खेला गया 50-50 का खेल 10 गुना अधिक दामों पर खरीदी:
जो सामग्री बाजार में महज ₹20 की उपलब्ध है, उसे जेम (GeM) पोर्टल के माध्यम से ₹200 की आसमान छूती कीमतों पर खरीदा गया है।
नियमों को ठेंगा:
इस पूरी खरीदी में ‘भंडार क्रय नियम’ (Store Purchase Rules) की खुलेआम धज्जियां उड़ाई गईं।
टैक्स चोरी की आशंका:
सामग्री की खरीदी और बिलिंग में आयकर (Income Tax) एवं जीएसटी (GST) समेत अन्य कराधान नियमों का पालन नहीं किया गया है, जो एक गंभीर वित्तीय अपराध की श्रेणी में आता है।
हिडन सप्लाई का खेल:
जेम पोर्टल की पारदर्शिता को धता बताते हुए बैकडोर से ‘हिडन सप्लाई’ (पर्दे के पीछे से चहेतों को ठेका देने) के खेल को अंजाम दिया गया।
तहलका पत्रिका के तीखे सवाल: जिम्मेदार अधिकारियों की बोलती बंद
जब इस महाघोटाले को लेकर “तहलका पत्रिका” की टीम ने विभाग के आला अधिकारियों से तीखे सवाल पूछे, तो किसी के पास कोई संतोषजनक जवाब नहीं था। इस चुप्पी ने साबित कर दिया है कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है।
बड़ा सवाल:
आखिर इस पूरे भ्रष्टाचार का ‘मास्टरमाइंड’ कौन है?
बिना भौतिक सत्यापन और गुणवत्ता जांच के करोड़ों के फर्जी बिलों को किसने हरी झंडी दिखाई?
सत्यापनकर्ता अधिकारी (Verifying Officers) इस जांच के घेरे में आने के डर से अब क्यों बच रहे हैं?
नियमों और वैधानिक प्रावधानों के तहत होगी कडी कार्रवाई
इस घोटाले की जड़ें इतनी गहरी हैं कि अब यह मामला केवल स्थानीय स्तर पर शांत होने वाला नहीं है।
खोजी टीम द्वारा जुटाए गए अकाट्य साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर निम्नलिखित वैधानिक कदम उठाए जा रहे हैं:
केंद्रीय एवं राज्य स्तरीय शिकायत मय साक्ष्य के:
पूरे मामले के दस्तावेजों, तुलनात्मक दरों और फर्जी बिलों के पुलिंदे के साथ केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और राज्य के स्वास्थ्य मंत्री को औपचारिक शिकायत भेजी जा रही है।
सत्यापन अधिकारियों पर गाज:
जिन अधिकारियों ने बिना सामग्री की जांच किए ‘सत्यापन प्रमाण पत्र’ (Stock Entry & Verification) जारी किया, उन पर धोखाधड़ी (IPC/BNS के तहत) और विभागीय कार्रवाई की तलवार लटकती नजर आ रही है।
फर्जीवाड़ा करने वालों की नींद हराम:
“तहलका पत्रिका” के इस खुलासे के बाद से ही भ्रष्टाचार में लिप्त सप्लायरों और अधिकारियों के सिंडिकेट में खलबली मच गई है। अपनी खाल बचाने के लिए अब फाइलों को खुर्द-बुर्द करने और कागजों को दुरुस्त करने का खेल पर्दे के पीछे शुरू हो चुका है।
लेकिन, जनता के टैक्स की गाढ़ी कमाई पर डाका डालने वालों का चेहरा बहुत जल्द बेनकाब होने वाला है।










