किसानों को शीघ्र मिले न्यायोचित मुआवजा

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हाल ही के दिनों में मौसम के बिगड़े मिजाज के चलते खेतों में तैयार रबी की फसलों को अतिवृष्टि व ओलों से हुए नुकसान की शीघ्र क्षतिपूर्ति की आस किसान लगाये बैठे थे। इस दिशा में हरियाणा सरकार ने पहल की और मानक तैयार करके फसलों का मुआवजा तय किया। गिरदावरी कराकर नुकसान का जायजा लेने के बाद पंद्रह दिनों में किसानों को मुआवजा देने का वादा किया है। इसी क्रम में अब पंजाब सरकार ने भी किसानों के नुकसान को कम करने के लिये वर्षा व ओलावृष्टि से हुई क्षति के अनुरूप मुआवजा देने की घोषणा की है। रविवार को मुख्यमंत्री ने पंजाब के उन जिलों का दौरा किया जहां फसलों को ज्यादा नुकसान हुआ है। दरअसल, मोगा, मुक्तसर साहिब, बठिंडा व पटियाला आदि जनपदों में प्रभावित खेतों का निरीक्षण करके मुख्यमंत्री मान ने घोषणा की कि मुआवजा राशि 25 फीसदी बढ़ाई गई है। पंजाब सरकार ने घोषणा की है कि फसलों को 75 फीसदी से अधिक नुकसान पर किसानों को 15000 रुपये तथा तैंतीस फीसदी से 75 फीसदी तक के नुकसान पर प्रति एकड़ 6750 रुपये की दर से मुआवजा दिया जायेगा। इसके साथ ही श्रमिकों को भी दस फीसदी मुआवजा दिया जायेगा। वहीं अतिवृष्टि में पूरे मकान को हुए नुकसान के लिये 95100 और मामूली नुकसान पर 5200 रुपये की मुआवजा राशि दी जायेगी। निस्सदेह, पंजाब सरकार का यह कदम सराहनीय है क्योंकि विगत में जो मुआवजा दिया जाता था, वो एक मजाक की तरह बेहद कम था। यहां तक कि किसानों को नाममात्र का मुआवजा ही मिल पाता था। मान सरकार दावा कर रही है कि न केवल मुआवजा राशि में वृद्धि हुई है बल्कि यह राशि जल्दी से जल्दी किसान के खाते में जाये, यह सुनिश्चित किया जा रहा है। यह विडंबना ही है कि तेज हवाओं, बारिश व ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान उस समय हुआ जब रबी की फसल लगभग कटाई के लिये तैयार थी।

यह अच्छी बात है कि पंजाब व हरियाणा की सरकारें समय पर किसानों के जख्मों पर मरहम लगाने की इच्छाशक्ति दिखा रही हैं। फसलों को हुई क्षति के चलते किसानों का उत्पादन कम हुआ है और एक सीजन कमोबेश बेकार चला गया है। जिला उपायुक्तों को प्रभावित क्षेत्रों में तुरंत गिरदावरी कराने के निर्देश दिये गये हैं ताकि किसान को जल्दी राहत मिले। सवाल उठता है कि फसलों के लिये जो केंद्र सरकार की बीमा योजना लागू है, उससे समय रहते मुआवजा क्यों नहीं मिल जाता। देखने में आता है कि किसान के बजाय बीमा कंपनियां हमेशा फायदे में रहती हैं। अब मान सरकार कह रही है कि वह नयी फसल बीमा योजना लाएगी। जिसका लक्ष्य किसानों को यथाशीघ्र असली राहत देने का है। निस्संदेह, आज किसान एक बड़ा वोट बैंक है। यही वजह है कि सरकारें व नेता घोषणाएं करने में तो देर नहीं लगाते हैं, लेकिन धरातल पर उसका असर कम नजर आता है। निस्संदेह, हर तरह से किसानों के हितों की रक्षा की जानी चाहिए। किसानों को भी लगना चाहिए कि मुश्किल घड़ी में उनके दुख-दर्द के प्रति सरकार का रवैया संवेदनशील रहा है। यह भी कि सरकार बहुसंख्यक किसानों की पीड़ा को भली-भांति समझती है। यहां खेतिहर श्रमिकों की समस्या पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। यह राहत उन लोगों को भी मिलनी चाहिए, जो दूसरे का खेत ठेके पर लेकर खेती करते हैं। अक्सर यह मुआवजा खेती करने वाले किसान की बजाय धनाढ्य खेत मालिक को मिल जाया करता था। पंजाब सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि ठेके पर खेती करने वाले किसानों को ही फसल को हुए नुकसान का मुआवजा दिया जाये। इतना ही नहीं, सरकारों को खेती को लाभप्रद बनाने के लिये किसानों को गेहूं और धान के चक्र से बाहर निकालकर वैकल्पिक फसलों के लिये प्रोत्साहित करना चाहिए। साथ ही इन उत्पादों के न्यूनतम समर्थन मूल्य की भी व्यवस्था करनी चाहिए, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हो सके। चिंता की बात यह है कि मार्च में असामान्य बारिश के बाद माह के अंतिम दिनों में अधिक वर्षा पश्चिमी विक्षोभ के चलते होने की बात कही जा रही है।

 

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