बिहार के पूर्णिया जिला मुख्यालय से 10 किलोमीटर दूर माता स्थान मंदिर है. यहां दूर-दूर से श्रद्धालु आकर पूजा करते हैं. मंदिर के सदस्य एवं पुजारी अयोध्या परिहार बताते हैं कि यह मंदिर 100 वर्ष पुराना है. पहले यहां उनके पूर्वज पूजा-पाठ करते थे, लेकिन वर्ष 1990 के बाद से उन्होंने इस मंदिर में पूजा-पाठ करना शुरू किया. उन्होंने तब से माता के मंदिर में रहना शुरू किया. माता के आशीर्वाद का उपयोग करने लगे. जो भी दुखिया उनके पास फरियाद लेकर आते थे, उन्हें वो मंदिर के उपचार से ठीक कर देते हैं. धीरे-धीरे यह बात दूर दूर तक फैलने लगी तो लोग इस मंदिर में पहुंच कर पूजा-अर्चना करने आने लगे.
परिहार बाबा आगे कहते हैं कि इस मंदिर में कामना पूरी होने की बात नहीं है, कामना पूरी होने के लिए सबसे पहले कर्म करना जरूरी है. इसके लिए अपने घर में अपने माता-पिता का सम्मान करें, उनकी सेवा करें. जिस मां ने अपने गर्भ में नौ महीने रख कर, दुख सहन कर, पीड़ा को झेल कर हमें जिंदगी दी, तो हमारा कर्तव्य है कि हम उनकी सच्चे मन से सेवा करें. इससे भगवान की कृपा सदा बनी रहेगी. उन्होंने कहा कि आजकल के जमाने में 95 प्रतिशत लोग अपने कर्म को छोड़ कर इधर-उधर शांति पाने के लिए मंदिर-मंदिर में पूजा-पाठ के लिए घूमते-फिरते रहते हैं. ऐसा नहीं है. आप अगर अपने घर के माता-पिता की पूजा और उनकी सेवा करेंगे तो मंदिर मे आने के बाद आपकी मनोकामनाएं निश्चित रूप से पूर्ण होगी.
‘मंदिर में पूजा कम और घूमने ज्यादा आते हैं’
उन्होंने कहा आजकल मंदिर में कई लोग पूजा-अर्चना के बहाने घूमने-फिरने आते हैं. उन्होंने कहा कि कई धर्मों में ऐसा देखने को मिलता है कि वो अपने धर्म के अनुसार समय से पूजा-पाठ करते हैं, लेकिन हिंदू धर्म को मानने वाले लोग मंदिर में आने के बाद पूजा-अर्चना कम करते हैं. उन्होंने कहा कि मंदिर परिसर में कई जगह दुर्गा चालीसा, हनुमान चालीसा एवं अन्य कई चालीसा का पाठ लगा हुआ है, लेकिन लोग इसे नहीं पढ़ते. इसको पढ़ना चाहिए.
माता पिता को भूल, भगवान के बहाने खूब लेते सेल्फी
उन्होंने कहा आजकल लोग पूजा-पाठ करने मंदिर आते हैं, लेकिन उनका इसमें ध्यान कम रहता है. सेल्फी लेकर पूजा कर मंदिर परिसर में फोटो खींचने में लग जाते हैं. उन्होंने कहा कि ऐसा बिल्कुल नहीं करना चाहिए. किसी मंदिर में जाने से पहले, सर्वप्रथम आप अपने घर के देवता यानी माता-पिता की सेवा करें. इसके बाद, मंदिर में जाएंगे और भगवान की पूजा करेंगे तो आपकी इच्छाएं (मनोकामना) पूरी होंगी.









