जितने भी ड्राई फ्रूट हैं, उनमें सबका बाप है गोल दाने वाला अखरोट. हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के मुताबिक ज्यादातर ड्राई फ्रूट में सैचुरेटेड फैट होता है, लेकिन अखरोट में पोलीसैचुरेटेड फैट के साथ ओमेगा 3 फैटी एसिड और अन्य कई तरह के एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो अन्य किसी भी ड्राई फ्रूट में एक साथ नहीं होते. अखरोट में अल्फा लीनोलेनिक और लीनोलेनिक एसिड होता जो एंटी-इंफ्लामेटरी होता है. यानी यह शरीर के अंदरुनी हिस्सों में सूजन होने ही नहीं देता. लीनोलेनिक एसिड के कारण ब्लड वेसल्स भी हेल्दी रहता है. इससे खून के अंदर फैट का जमावड़ा नहीं होता है. अखरोट का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह हार्ट अटैक की आशंका को पूरी तरह खत्म कर सकता है.
हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के मुताबिक स्कूल के मुताबिक, पहली बार एक बड़े पैमाने पर हुई रिसर्च में यह साबित हुआ कि अखरोट टोटल कोलेस्ट्रॉल को कम करता है. इसका सेवन करने से हर तरह की दिल की बीमारियों का जोखिम बहुत कम हो जाता है.
कई अध्ययनों के ट्रायल में भी दावा किया गया है कि अखरोट का सीमित मात्रा में सेवन ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करता है. जिन लोगों को दिल से संबंधित जटिलताएं हैं, उनके लिए भी अखरोट बहुत फायदेमंद है.
हार्वर्ड मेडिकल ने पिछले 26 अध्ययनों के डाटा का विश्लेषण किया और 1000 से ज्यादा लोगों पर परीक्षण किया. इसके बाद पाया कि अखरोट का सेवन सीध टोटल कोलेस्ट्रॉल को 7 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर से कम पर ले आता है.
इसी तरह अखरोट का सेवन एलडीएल कोलेस्ट्रॉल को 5.5 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर, ट्राइग्लिसराइड्स को 5.7 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर और एपोप्रोटीन बी को 4 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर तक कम पर ले आता है.
सबसे अच्छी बात यह है कि अखरोट का थोड़ा ज्यादा सेवन भी नुकसान नहीं पहुंचाता है. हालांकि रिसर्च में एक दिन में कितना अखरोट खाना चाहिए, इसके बारे में कुछ नहीं कहा गया है. लेकिन अखरोट के सेवन से वजन नहीं बढ़ता है. यानी यह वजन को भी नियंत्रित करता है.










