शरीर में जब प्रोटीन के टूटने से यूरिक एसिड ज्यादा बनने लगता है तब अर्थराइटिस की बीमारी हो जाती है. इस बीमारी में जोड़ों में बेपनाह दर्द करता है. मरीज दर्द से छटपटाने लगता है. इसमें जोड़ों के कार्टिलेज घिसने लगते हैं. आमतौर पर यूरिक एसिड किडनी से होते हुए पेशाब के रास्ते शरीर से बाहर निकल जाता है. लेकिन जब जरूरत से ज्यादा प्यूरिन शरीर में बनने लगे तो किडनी इसे बाहर निकालने में सक्षम नहीं हो पाता है. इसके बाद यह अतिरिक्त यूरिक एसिड शरीर में जोड़ों के कार्टिलेज में जमा होने लगता है और यह सूजन पैदा करने लगता है. इससे गठिया की बीमारी होती है. यह बहुत ही दर्दनाक बीमारी है. एक सामान्य व्यक्ति में 3.5 से 7.2 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर में यूरिक एसिड होना चाहिए. इससे ज्यादा हो जाने पर दर्द बहुत बढ़ जाता है. यूरिक एसिड को कंट्रोल करने के लिए हालांकि डाइट पर भी नियंत्रण जरूरी है लेकिन कुछ ऐसी मेडिसीनल पत्तियां होती हैं जिन्हें चबाने से अर्थराइटिस के दर्द से राहत मिलती है.
1. पुदीने के पत्ते-पुदीना के पत्ते में पर्याप्त मात्रा में आयरन, पोटैशियम, मैग्नीशियम, विटामिन ए और फॉलेट पाया जाता है. पुदीना एंटी-इंफ्लामेटरी होता है. पुदीना के पत्ते खाने से यूरिन से प्यूरिन को फ्लश आउट करने में मदद मिलती है. पुदीना बॉडी को डिटॉक्स भी करता है.
2.धनिया के पत्ते-ऑनमनोरमा वेबसाइट के मुताबिक धनिया के पत्ते अपनी खूशबू के लिए जाने जाते हैं. लेकिन यह बेहद औषधीय गुणों से भरपूर है. धनिया के पत्ते में कैल्शियम, पोटैशियम, थियामिन, फॉस्फोरस, विटामिन सी, विटामिन के सहित कई पोषक तत्व पाए जाते हैं. धनिया के पत्ते खून में क्रिएटिनीन लेवल और यूरिक एसिड को करता है.
3. तेज पत्ता-तेज पत्ता भी कई औषधीय गुणों से भरपूर है. तेजपत्ता एंटी-इंफ्लामेटरी होता है. तेजपत्ता को पानी में देकर बॉयल करने के बाद इसके पानी को पीया जा सकता है. इससे घुटनों का दर्द कम होता है.
4. पान का पत्ता-पान का पत्ता चबाने से भी यूरिक एसिड पेशाब के रास्ते फ्लश आउट हो जाता है. पान का पत्ता आप सुबह-सुबह चबा सकते हैं जिससे दिन भर जोड़ों के दर्द से परेशानी नहीं होगी.
5.करी पत्ते-करी पत्ते का इस्तेमाल लोग सब्जियों में करते हैं लेकिन करी पत्ते यूरिक एसिड को फ्लश आउट करने में भी माहिर है. करी पत्ते का सेवन खून में जमा गंदा यूरिक एसिड को पेशाब के रास्ते बाहर निकाल देता है.









