कच्चे माल की लगातार बढ़ती कीमतों और महंगी होती कारों की कीमतों के बीच अब ऑटोमोबाइल कंपनियां बड़ा फैसला ले सकती हैं. कारों की कीमत को ग्राहकों के लिए कम रखने और कॉस्ट कटिंग के जरिए अपना मुनाफा बढ़ाने के लिए अब एक ऐसा निर्णय लेने पर विचार किया जा रहा है जो परेशान कर सकता है. कार कंपनियां अब तक कारों की कीमत को कम रखने के लिए कॉस्ट कटिंग का सहारा ऐसे पार्ट्स या कहें फीचर्स पर किया करती थीं जिनका ज्यादा फर्क ग्राहक पर नहीं पड़ता था. लेकिन अब होने जा रही कॉस्ट कटिंग नई कार खरीदने वाले हर ग्राहक पर भारी पड़ेगी. क्योंकि कंपनी अब आपकी कार से एक टायर को ही कम करने जा रही है.
दरअसल लगातार बढ़ते कच्चे माल की कीमतें और सप्लाई चेन की प्रॉब्लम्स के साथ ही बीएस 6 फेज 2 के चलते बढ़े हुए खर्च को संभालने के लिए कंपनियां कई बार कारों की कीमतों को पिछले एक साल के अंदर बढ़ा चुकी हैं. इसके बावजूद भी ऑटो मैन्युफैक्चरर्स को घाटा हो रहा है. जिसके बाद अब कंपनियों ने कार से स्टेपनी को गायब करने का फैसला लिया है.
सूत्रों के अनुसार इस बात को लेकर कई दिग्गज कंपनियां अंदर खाने ऐसी तैयारी में जुटी हैं जिसके बाद कार की स्टेपनी तो उसके साथ आएगी लेकिन इसके लिए आपको अलग से रुपये देने पड़ सकते हैं. ये एक कंपलसरी एक्सेसरी के तौर पर कार की एक्स शोरूम कीमत से अलग होगा.
क्या कहते हैं नियम…
नियम के अनुसार बिना स्टेपनी के कार ऑन रोड नहीं दी जा सकती है. इसके चलते कार कंपनियां इसके लिए अलग से पैसा ले सकती हैं. हालांकि ये पूरी तरह से गायब नहीं होगी और कार के साथ ही होगी लेकिन बेसिक कार में से इसे जोड़ा नहीं जाएगा.
कितना आएगा फर्क…
कंपनियां यदि ऐसा करती हैं तो हर नई कार के ग्राहक पर 5 से 6 हजार रुपये का अतिरिक्त बोझ बढ़ सकता है. इसको सही से ऐसे समझा जा सकता है कि कार के साथ कई कंपनियां फिलहाल भी एक्सेसरीज का पैक देती हैं, जिसमें मैटिंग, मड फ्लैप्स जैसी चीजें होती हैं. अब ऐसा ही एक पैक कार स्टेपनी का भी होगा जिसमें जैक, स्टेपनी टायर और टो विंग होगा. फर्क सिर्फ इतना होगा कि ये पैक कंपलसरी होगा.
कब तक होगा फैसला…
हालांकि किसी भी कंपनी ने फिलहाल इसको लेकर कोई बयान जारी नहीं किया है लेकिन माना जा रहा है कि इसी साल से कंपनियां ऐसा कुछ कर सकती हैं. लेकिन इसको लेकर कोई निर्धारित तारीख या समय नहीं बताया गया है.









