अटल जी के नाम पर ‘अंधेरगर्दी’: छत्तीसगढ़ में अटल परिसर और प्रतिमा निर्माण में भारी भ्रष्टाचार, कागजों पर चमकाए जा रहे कॉपर नियम
विशेष संवाददाता, छत्तीसगढ़
रायपुर:
पूरे छत्तीसगढ़ में दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी की स्मृति को जीवंत रखने के लिए ‘अटल परिसर’ का निर्माण कराया जा रहा है। सरकार की मंशा श्रद्धा और सम्मान प्रकट करने की है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। इस पवित्र योजना की आड़ में अधिकारी और ठेकेदार मिलकर भ्रष्टाचार का एक बड़ा खेल खेल रहे हैं।

अटल जी की प्रतिमा की गुणवत्ता, प्रतिष्ठा और निर्माण कार्य के मानकों को ताक पर रखकर करोड़ों का हेरफेर किया जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, प्रदेश में इस निर्माण कार्य में हुए महा-भ्रष्टाचार का बहुत जल्द एक बड़ा और प्रामाणिक खुलासा होने जा रहा है, जिससे कई रसूखदारों के चेहरे बेनकाब होंगे।
उच्च विभागों से पत्राचार शुरू, सर्वप्रथम राजनांदगांव जिले से होगा भांडाफोड़
इस पूरे घपले की शुरुआत और इसका सबसे पहला बड़ा भांडाफोड़ प्रदेश की एक नवगठित नगर पंचायत से होने जा रहा है। इस संबंध में “तहलका पत्रिका परिवार” द्वारा उच्च विभागों को पत्राचार (शिकायती पत्र मय शपथ-पत्र) किया जा रहा है।
सबूतों के साथ भेजे जा रहे इन पत्रों ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा जाने की पूरी संभावना है।
बहुत जल्द इस विशिष्ट नगर पंचायत का नाम और इसमें संलिप्त चेहरों का आधिकारिक तौर पर पर्दाफाश होने वाला है।
‘जुम्मा-जुम्मा आठ दिन’ हुए नहीं और शुरू हो गया भ्रष्टाचार का खेल:
हैरानी की बात तो यह है कि जिस नगर पंचायत को अस्तित्व में आए अभी ‘जुम्मा-जुम्मा आठ दिन’ भी नहीं हुए हैं, वहां विकास कार्य शुरू होने से पहले ही भ्रष्टाचार के दीमक ने अपनी जगह बना ली है। नई नवेली नगर पंचायत में व्यवस्थाएं सुधरने के बजाय, आते ही सबसे पहले सरकारी खजाने को चूना लगाने का खेल शुरू कर दिया गया है।
उक्त नगर पंचायत में अटल परिसर में लाखों का ‘खेला’
इस नई नवेली नगर पंचायत के अंतर्गत बन रहे अटल परिसर में सीधे तौर पर लाखों रुपए का ‘खेला’ कर दिया गया है। आबंटन और जारी बजट के अनुरूप जिस उचित मापदंड से निर्माण कार्य कराया जाना था, उसे पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है।
अधिकारियों और ठेकेदारों की जुगलबंदी के कारण धरातल पर काम बेहद घटिया स्तर का हो रहा है।
जनता की आंखों में धूल झोंकने की तैयारी: 👇
आम जनता को केवल बाहरी चकाचौंध और दिखावा करके गुमराह किया जा रहा है। ऊपर से रंग-रोगन और लाइटें लगाकर काम को ‘चकाचक’ दिखाया जा रहा है, ताकि अंदर छिपा भ्रष्टाचार किसी को नजर न आए।
नियम और ड्राइंग-डिजाइन दरकिनार, जांच की मांग
ड्राइंग-डिजाइन के विपरीत सिविल कार्य:👇
“तहलका पत्रिका” के तकनीकी जानकारों के अनुसार, इस परिसर का सिविल (स्ट्रक्चरल) कार्य स्वीकृत ड्राइंग-डिजाइन के अनुरूप बिल्कुल नहीं किया जा रहा है। पिलर की मजबूती, सीमेंट-कंक्रीट का अनुपात और सरियों की मोटाई में भारी कटौती की गई है, जिससे भविष्य में इस ढांचे के ढहने का खतरा बना हुआ है।
प्रतिमा के वजन और मजबूती में हेराफेरी: 👇
सबसे शर्मनाक बात यह है कि परिसर में जो श्रद्धेय अटल जी की मूर्ति (स्टेचू) लगाई जा रही है, वह तय मानक वजन के अनुसार नहीं बनाई गई है। मूर्ति के निर्माण में न तो धातु/सामग्री की गुणवत्ता का ध्यान रखा गया है और न ही उसकी मजबूती का। यह सीधे तौर पर एक महान नेता की प्रतिष्ठा के साथ खिलवाड़ है।

लैब टेस्ट से सामने आएगा सच
मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग तेज हो गई है। इस पूरे निर्माण कार्य और विशेषकर अटल जी की प्रतिमा की उच्च स्तरीय लैब (Lab) में जांच कराई जायेंगी और लैब टेस्ट होने से सिविल वर्क की ताकत और मूर्ति के वास्तविक वजन व धातु की गुणवत्ता का दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।
अगर समय रहते उच्च विभाग के पत्राचार पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो सम्मान के प्रतीक ये ‘अटल परिसर’ भ्रष्टाचार के जीवंत स्मारक बनकर रह जाएंगे।










