मुख्यमंत्री साय के जिले के 9.84 करोड़ के टेंडर पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, अब जल संसाधन विभाग के 4 अफसरों पर गिरी गाज, वेतन से वसूली की तैयारी

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जशपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के गृह जिले जशपुर की एक सिंचाई परियोजना से जुड़ा करीब 9.84 करोड़ का टेंडर अब बड़े प्रशासनिक विवाद का रूप ले चुका है. लोअर डोंगरी डायवर्जन स्कीम के गेट मरम्मत और लाइनिंग कार्य से जुड़े टेंडर पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की गंभीर टिप्पणियों के बाद अब जल संसाधन विभाग ने अपने ही चार वरिष्ठ अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया. इतना ही नहीं, हाईकोर्ट द्वारा लगाए गए ₹1 लाख के खर्च की राशि संबंधित अधिकारियों के वेतन से वसूले जाने की भी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.
मामला Tender No. 183610 से जुड़ा है. जिसके तहत जशपुर जिले की लोअर डोंगरी डायवर्जन स्कीम में गेट रिपेयर एवं लाइनिंग का काम कराया जाना था. यह परियोजना किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने वाली महत्वपूर्ण जल संसाधन योजना मानी जाती है.
विवाद तब शुरू हुआ जब टेंडर प्रक्रिया में एम/एस आर्य कंस्ट्रक्शन कंपनी को तकनीकी रूप से अयोग्य घोषित किए जाने के बाद वित्तीय बोली की प्रक्रिया को लेकर मामला कोर्ट पहुंच गया. इस पर सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने WPC No. 2322/2026 में 11 मई 2026 को पारित आदेश में निविदा प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए. कोर्ट ने प्रक्रिया में मनमानी और समानता के संवैधानिक सिद्धांत (अनुच्छेद-14) से जुड़े प्रश्नों का उल्लेख करते हुए याचिकाकर्ता के पक्ष में 1 लाख की लागत देने का आदेश दिया.
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब जल संसाधन विभाग ने मुख्य अभियंता (निविदा प्रकोष्ठ) के.एस. गुरुवर, वित्त नियंत्रक रुद्र प्रताप सिंह चौहान, कार्यपालन अभियंता अरविंद कुमार कोशले तथा वरिष्ठ लेखा अधिकारी बालचंद शेखर मिश्रा को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं.
विभाग का कहना है कि प्रथम दृष्टया निविदा प्रक्रिया में तथ्यों की अनदेखी, पदीय दायित्वों के खिलाफ काम और नियमों के खिलाफ लापरवाही मालूम होती है. अधिकारियों से पांच दिन के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है कि उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए और हाईकोर्ट द्वारा लगाया गया ₹1 लाख का खर्च उनके वेतन से क्यों न वसूला जाए. समय पर जवाब नहीं मिलने की स्थिति में विभाग ने एकपक्षीय कार्रवाई की चेतावनी भी दी है.
यह मामला इसलिए भी विशेष महत्व रखता है क्योंकि यह मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के गृह जिले जशपुर की एक बड़ी सिंचाई परियोजना से जुड़ा है. ऐसे में हाईकोर्ट की टिप्पणियों के बाद विभाग द्वारा अपने ही वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू होना प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है.
अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि संबंधित अधिकारी अपने बचाव में क्या जवाब देते हैं और जल संसाधन विभाग इस मामले में आगे क्या निर्णय लेता है. फिलहाल विभाग ने केवल कारण बताओ नोटिस जारी किया है और अंतिम निर्णय अधिकारियों के जवाब तथा आगे की विभागीय प्रक्रिया के बाद ही लिया जाएगा.

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