बिजली का उत्पादन बढ़ाने के लिए राज्य शासन ने 5 बांधों में पंप स्टोरेज तकनीक से हाइडल पावर प्लांट लगाने के लिए स्थल का चयन किया है। इसमें बांगो बांध से 40 किलोमीटर दूर 1200 मेगावॉट का प्लांट लगाने की प्रक्रिया आगे बढ़ी है। बांगो में बिजली उत्पादन कंपनी ही प्लांट लगाएगी। बाकी 4 स्थानों पर प्लांट लगाने के लिए प्राइवेट कंपनी से अनुबंध किया जाएगा। बांगो के लिए पर्यावरण मंजूरी की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।
पावर जेनरेशन कंपनी ने पिछले साल नवंबर में केंद्र सरकार की एजेंसी वॉटर एंड पावर कंसलटेंसी सर्विसेज लिमिटेड के साथ 7700 मेगावॉट के 5 स्टोरेज हाइड्रो पावर प्लांट के डीपीआर के लिए अनुबंध किया था। उसके बाद से ही पंप स्टोरेज हाइडल पावर प्लांट को लेकर प्रक्रिया चल रही है। प्रदेश के डिप्टी सीएम और ऊर्जा मंत्री टीएस सिंहदेव ने शनिवार को कोरबा में 1320 मेगावॉट के सुपर क्रिटिकल ताप विद्युत परियोजना के भूमिपूजन कार्यक्रम में कहा था कि अब आगे कोयले पर आधारित पावर प्लांट नहीं लगाएंगे। पानी से बिजली उत्पादन किया जाएगा। यह भी बड़ी योजना है। 5 स्थानों पर पंप स्टोरेज तकनीक से बनने वाली हाइड्रो पावर प्लांट में से बांगो बांध पर अभी अधिक फोकस किया जा रहा है। यहां बिजली उत्पादन कंपनी ही प्लांट लगाएगी। इसका डीपीआर भी कंपनी ही बनाएगी। बाकी के लिए टेंडर से प्राइवेट कंपनी को दिया जाएगा। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी के एमडी संजीव कुमार कटियार के मुताबिक प्रदेश में इस तरह की परियोजना से 7700 मेगावाट बिजली बनाने की योजना है।
हसदेव बांगो बांध कोरबा व सिकासेर जलाशय गरियाबंद में 1200-1200 मेगावाट, जशपुर के डोंगरी में 1400 मेगावाट, रौनी में 2100 मेगावाट व बलरामपुर के कोटपट्टी में 1800 मेगावाट का पंप स्टोरेज हाइडल प्लांट लगाने की योजना है। इस साल गर्मी में बिजली की मांग रिकार्ड 5800 मेगावाट तक पहुंच गई थी, जो अगले 5 वर्ष में बढ़कर 10 हजार मेगावाट हो जाने का आंकलन है। जनरेशन कंपनी की उत्पादन क्षमता 2978.7 मेगावाट है। 1320 मेगावाट का प्लांट बनने पर 4298.7 मेगावाट हो जाएगी। इससे पानी से बिजली उत्पादन करने पर अधिक फोकस किया जा रहा है। एक अधिकारी के मुताबिक बांगो में पंप स्टोरेज हाइडल प्लांट बनेगा। इसके 2026 तक बनाने की योजना है।
क्या है पंप स्टोरेज तकनीक अभी बांगो में जो हाइड्रो पावर प्लांट है, उसमें बांध का पानी तेज गति से टरबाइन के ऊपर गिरता है। टरबाइन के घूमने से बिजली पैदा होती है, वहीं भेजा गया पानी टरबाइन से होकर नदी में बह जाता है। वहीं पंप स्टोरेज तकनीक में बदलाव यह होगा कि बांगो बांध के ऊपरी जल भराव क्षेत्र में यह प्लांट स्थापित होगा।
बांध के ऊपरी क्षेत्र में स्थित पानी टरबाइन पर काइनेटिक फोर्स का उपयोग करते हुए गिरेगा और टरबाइन के घूमने से बिजली बनेगी। वहीं भेजे गए पानी को फिर से स्टोर कर लिया जाएगा। दिन के समय बांध के पानी के ऊपर स्थापित सोलर प्लांट से बनी सस्ती बिजली का उपयोग कर पंप से पुन: पानी को ऊपरी हिस्से में भेजा जाएगा। इस तरह से पानी का उपयोग बिजली बनाने में अनेक बार हो सकेगा। इस तरह की बड़ी योजना तेलंगाना, तमिलनाडु, महाराष्ट्र व पश्चिम बंगाल में पहले से स्थापित है।
डीपीआर के साथ मंजूरी की प्रक्रिया में 1 साल लगेगा ^स्टेट पावर जेनरेशन कंपनी के एमडी संजीव कुमार कटियार का कहना है कि बांगो में बिजली उत्पादन कंपनी ही प्लांट लगाएगी। बाकी स्थानों में प्राइवेट कंपनी से अनुबंध होगा । बांगो के लिए डीपीआर बना रहे हैं। पर्यावरण मंजूरी में 1 साल लगेगा । ज्वाइंट वेंचर से 7700 मेगावाट बिजली उत्पादन की जाएगी।
कोयले पर आधारित प्लांट के लिए राखड़ समस्या कोयले पर आधारित पावर प्लांट के लिए राखड़ एक बड़ी समस्या है। इसकी उपयोगिता बढ़ाने के लिए अब सड़कों पर भी इसका उपयोग होने लगा है। राखड़ बांध के लिए जमीन भी नहीं मिल पा रही है। हाइडल प्लांट में यह समस्या नहीं है। प्रदूषण से भी यह मुक्त रहता है। कोयले की ढुलाई के लिए संसाधन की जरूरत पड़ती है।
बिजली की मांग 5800 मेगावाट तक










