कर्नाटक के रणक्षेत्र में थमा प्रचार का शोर

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कर्नाटक में सोमवार को विधानसभा चुनाव के चुनाव प्रचार का शोर थम गया है। चुनाव प्रचार के अंतिम दिन कांग्रेस और भाजपा के नेताओं ने जमकर प्रचार किया। कर्नाटक की सत्ता में काबिज होने के लिए भाजपा और कांग्रेस ने एड़ी चोटी का जोर लगा दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी ने अंतिम दिन वोटरों से कांग्रेस को जिताने की अपील की।

PM मोदी ने संभाली चुनाव प्रचार की कमान
मोदी ने दक्षिणी राज्य में 18 रैलियों को संबोधित किया। उन्होंने 27 अप्रैल को डिजिटल माध्यम से पार्टी कार्यकर्ताओं से संवाद किया था। प्रधानमंत्री ने छह रोड शो का भी नेतृत्व किया, जिसमें तीन बेंगलुरु में और एक-एक मैसूर, कलबुर्गी और तुमकुरु में हुए। मोदी ने प्रचार के दौरान उनसे मिलने वाले लोगों का चयन पार्टी कार्यकर्ताओं, पेशेवरों और शहर के प्रमुख नागरिकों के अच्छे मिश्रण को सुनिश्चित करने के लिए सावधानीपूर्वक किया गया था। उन्होंने अपनी एक ऐसी ही बातचीत के दौरान पद्म पुरस्कार विजेताओं से भी मुलाकात की थी।

मोदी ने भाजपा के प्रचार अभियान का नेतृत्व किया है, क्योंकि वह राज्य में सत्ता बरकरार रखने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है। कर्नाटक में 1985 के बाद से कोई सत्ताधारी पार्टी सत्ता में वापसी करने में विफल रही है। भाजपा ने इस मिथक को तोड़ने का भरोसा जताया है, जबकि विपक्षी कांग्रेस ने भी सत्ता में वापसी के लिए सघन प्रचार अभियान चलाया है। कर्नाटक विधानसभा के 224 सदस्यों के चुनाव के लिए मतदान 10 मई को होगा और मतगणना 13 मई को होगी।

भाजपा ने बजरंग दल से बजरंग बली तक पहुंचाई राजनीति
कांग्रेस कर्नाटक में रणक्षेत्र में शुरु से आगे चल रही थी। लेकिन उसने जैसे ही अपने चुनावी घोषणा पत्र का जिक्र किया तो मानों बीजेपी ने उसे चौतरफा घेर लिया। कांग्रेस ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में बजरंग दल को बैन करने की घोषणा की। इसके बारे में जैसे ही सभी को मालूम हुआ कि मानों एकाएक कर्नाटक में नाटक का स्तर अपने चरम पर पहुंच गया। बीजेपी ने मौका देख कर न सिर्फ लपका बल्कि इसे भुनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी रैलियों में जमकर कांग्रेस पर बरसे और बजरंग दल की तुलना बजरंग बली से करते हुए कांग्रेस को खूब लताड़ा। चूंकि कर्नाटक में 80 % मतदाता हिंदू हैं और कांग्रेस चूंकि शुरु से मंहंगाई, भ्रष्टाचार और मुस्लिम आरक्षण के मुद्दे पर भाजपा को घेर रही थी तो उससे भाजपा भी थोड़ा असहज महसूस कर रही थी लेकिन बजरंग दल को बैन करने वाली घोषणा ने बीजेपी को एक जबरदस्त मौका दे दिया। मजबूरन कांग्रेस के लोगों को यह तक कहना पड़ गया कि जब वह पार्टी सत्ता में आएगी तो राज्य में बजरंग बली की ढे़र सारे मंदिर बनवाएगी

आरक्षण पर घिरी कांग्रेस
13 मई को अगर राज्य में कांग्रेस की वापसी होगी तो वह मुस्लिमों को आरक्षण देने पर विचार करेगी। इसे लेकर उसने अपने घोषणा पत्र में भी बात कही है।चूंकि चुनाव से ऐन पहले भाजपा ने लिंगायत और वोक्कालिगा को 2-2 प्रतिशत आरक्षण दिया है और ये कुल चार प्रतिशत काटे गए वोट मुस्लिम आरक्षण का हिस्सा था। इस पर भी जमकर राजनीति हुई। भाजपा ने कांग्रेस को इस मुद्दे पर घेरा कि कांग्रेस संविधान से परे जाकर धर्म के आधार पर आरक्षण देने की बात करती है तो कांग्रेस ने भी कहा कि अगर भाजपा लिंगायत और वोक्कालिगा के लिए इतनी ही चिंतित थी तो चुनाव से ठीक पहले ही ये कदम क्यों उठाया। चार साल से सत्ता में थी तब से क्यों नहीं किया।

10 मई को होगी वोटिंग
सभी पार्टियों ने चुनाव प्रचार के अंतिम दिन अपनी पूरी ताकत झोंक दी। भाजपा के स्टॉलवार्ट नेता व राज्य के पूर्व सीएम बीएस येदियुरप्पा ने शिवमोगा में रोड-शो किया। यहां से उनके बेटे बीवाई विजयेंद्र चुनाव मैदान में हैं। शिरलकोप्पा में पार्टी के उम्मीदवार और उनके बेटे भी साथ दिखे। वहीं, कांग्रेस ने भी भाजपा की वापसी न हो इसके लिए पूरी कोशिश की है। जाते-जाते भाजपा के एक नेता पर जिन्होंने कि चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के परिवार को मार देने की बात कही तो कांग्रेस के एक नेता ने एफआईआर दर्ज करा दी है। कुल मिलाकर देखें तो दोनों तरफ से अंतिम दिन भी खूब घमासान रहा।

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