मोदी ने प्रशांत द्वीप देशों के साथ भारत की साझेदारी को बढ़ाया आगे

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हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की मौजूदगी को और प्रभावी बनाने के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को नई दिल्ली को प्रशांत द्वीपीय राष्ट्रों के “विश्वसनीय” साझेदार के तौर पर पेश किया। उन्होंने परोक्ष रूप से चीन का जिक्र करते हुए कहा कि जिन्हें विश्वासपात्र माना जाता था वो जरूरत के समय इस क्षेत्र के साथ “ नहीं खड़े थे”। मोदी ने एक शिखर सम्मेलन में 14 प्रशांत द्वीपीय देशों के शीर्ष नेताओं को बताया कि मुश्किल वक्त में दोस्त ही दोस्त के काम आता है।

उन्होंने आश्वस्त किया कि भारत “बिना किसी हिचकिचाहट” क्षेत्र के साथ अपनी क्षमताएं साझा करने के लिये तैयार है और “हम हर प्रकार से आपके साथ हैं।” कोविड-19 महामारी और अन्य वैश्विक विकास के प्रतिकूल प्रभाव का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि भारत चुनौतीपूर्ण समय में प्रशांत द्वीपीय देशों के साथ खड़ा रहा और उन्हें बताया कि वे नई दिल्ली पर भरोसा कर सकते हैं क्योंकि यह उनकी प्राथमिकताओं का सम्मान करता है और सहयोग के लिए इसका दृष्टिकोण मानवीय मूल्यों पर आधारित है।

उन्होंने हिंद-प्रशांत द्वीपीय सहयोग मंच (एफआईपीआईसी) शिखर सम्मेलन में किसी देश का नाम लिये बगैर कहा, “जिन्हें हम अपना विश्वासपात्र समझते थे, उनके बारे में ऐसा पाया गया कि वे जरूरत के समय हमारे साथ नहीं खड़े थे। इस मुश्किल दौर में पुरानी कहावत सही साबित हुई: सच्चा दोस्त वही है, जो कठिन घड़ी में काम आए।” मोदी ने कहा, “मुझे खुशी है कि भारत इस मुश्किल समय में भी अपने प्रशांत द्वीपीय देशों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहा।

फिर चाहे बात भारत में निर्मित टीकों की हो या आवश्यक दवाइयों की हो या गेहूं या चीनी की बात हो, भारत ने अपनी क्षमताओं के अनुसार अपने साथी देशों की मदद करना जारी रखा।” प्रधानमंत्री तीन देशों की यात्रा के अपने दूसरे चरण में रविवार को यहां पहुंचे। उन्होंने प्रशांत द्वीपीय देशों के लिए स्वतंत्र एवं मुक्त हिंद प्रशांत की महत्ता को भी रेखांकित किया और कहा कि भारत सभी देशों की संप्रभुता एवं अखंडता का सम्मान करता है। उन्होंने कहा, “भारत आपकी प्राथमिकताओं का सम्मान करता है।

 

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