बड़ा चमत्कारी है पारिजात का वृक्ष, स्वर्ग से धरती पर कैसे आए इसके फूल, पढ़ें रोचक पौराणिक कहानी

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भारत वर्ष में कई ऐसे पेड़-पौधे हैं, जिन्हें बेहद अद्भुत और पवित्र माना जाता है. इन पेड़-पौधों के बारे में रोचक कथाएं भी हिंदू धार्मिक ग्रंथों में मिलती है. मान्यताओं के अनुसार, कुछ पेड़ पौधों की पूजा करने से मन चाही इच्छा पूरी की जा सकती है. ऐसे ही एक पौधा है पारिजात का. कहा जाता है कि पारिजात का पौधा धरती पर स्वर्ग से आया था. पारिजात के पौधे के बारे में विख्यात है कि यह किसी भी हृदय रोग को खत्म कर सकता है. इसके अलावा, ये अन्य कई बीमारियों में भी उपयोग किया जाता है. हिन्दू धर्म शास्त्रों में पारिजात के पौधे की धरती पर उत्पत्ति के विषय में अनेकों कहानियां प्राप्त होती हैं. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु विशेषज्ञ पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा.

पारिजात के पौधे की प्रसिद्ध कथा
हिन्दू धर्म शास्त्रों के अनुसार, पारिजात के पौधे की कथा कुछ इस प्रकार है कि देवताओं और दानवों के बीच जब समुद्र मंथन हुआ था, उस समय समुद्र से 14 रत्न बाहर निकले, जिनमें से एक पारिजात का वृक्ष भी था. स्वर्ग के राजा इन्द्र ने इसे स्वर्ग में स्थापित करवाया, कालांतर में भगवान कृष्णा ने राजा इन्द्र से इसका एक बीज लेकर उसको अपनी पत्नी देवी रुकमणी को उपहार के स्वरूप दिया था.

समय के साथ-साथ यह पौधा बड़ा हुआ और जब इसमें फूल आने लगे, तो उसकी खुशबू दूर-दूर तक फैलने लगी. ऐसे में नारद मुनि ने भगवान कृष्ण की दूसरी पत्नी सत्यभामा को उकसाया कि कृष्ण ने ये इतना गुणकारी पौधा देवी रुकमणी को उपहार में दिया है और आपको नहीं. सत्यभामा इस बात से चिढ़ गईं और उन्होंने ही कृष्ण से पारिजात का पेड़ लाने की ज़िद पकड़ ली. देवी सत्यभामा की बात को मानते हुए भगवान कृष्ण ने इन्द्र पर हमला किया और पारिजात का पेड़ इंद्रलोक से लाकर सत्यभामा को दे दिया. जब भगवान कृष्ण ने पारिजात के वृक्ष को अपने साथ धरती पर ला रहे थे. तब देवराज इन्द्र ने पारिजात के पौधे को श्राप दिया कि इस पेड़ के फूल सिर्फ रात में खिलेंगे और इस पेड़ पर कभी फल नहीं आएगा.

किन स्थानों पर मिलता है पारिजात का पौधा
ज्योतिष शास्त्र और हिंदू धर्म में पारिजात के पौधे को बेहद ही गुणकारी पौधा माना जाता है. वैसे तो पारिजात का वृक्ष भारत की किसी भी स्थान पर पाया जा सकता है, लेकिन पूरे भारत वर्ष में जगह-जगह इस पेड़ को अलग-अलग नामों से जाना जाता है. जैसे हरश्रृंगार, पारिजात, प्राजक्ता, शेफाली और शिउली.

 

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