वैशाख महीने से है भगवान सूर्य का खास संबंध

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सनातन धर्म में ग्रह गोचर और राशि का परिवर्तन कभी कष्टकारी होता है, तो कभी शुभ माना जाता है . हिंदू पंचांग के मुताबिक जब सूर्य देव मेष राशि में प्रवेश करते हैं. तो हिंदू नव वर्ष की पहली संक्रांति मनाई जाती है. जिसे मेष संक्रांति कहा जाता है और यह संक्रांति वैशाख माह में पड़ती है. हालांकि आज हम आपको इस रिपोर्ट में बताएंगे कि भगवान सूर्य से वैशाख माह का क्या है संबंध है , क्यों वैशाख के महीने में भगवान सूर्य की विधि-विधान पूर्वक पूजा आराधना करते हैं. तो चलिए जानते हैं.

दरअसल ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक वैशाख का महीना 7 अप्रैल से शुरू हो चुका है और सनातन धर्म में वैशाख का माह बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. क्योंकि इसी माह में खरमास खत्म होता है और इसी माह से मांगलिक कार्यक्रम शुरू होते हैं. इतना ही नहीं इस पवित्र वैशाख माह का सीधा संबंध भी भगवान सूर्य से होता है. ज्योतिषाचार्य पंडित कल्कि राम के मुताबिक जब भगवान सूर्य मेष राशि में प्रवेश करते हैं तो उसे मेष संक्रांति के नाम से जाना जाता है इस साल मेष संक्रांति 14 अप्रैल को मनाया जाएगा.

मेष संक्रांति के दिन हुई थी खालसा पंथ की स्थापना
इसके अलावा मेष संक्रांति का संबंध सिख धर्म से भी है .इसी दिन सिख धर्म के 10 वें गुरु गोविंद सिंह ने खालसा पंथ की स्थापना भी की थी. इतना ही नहीं भगवान सूर्य की उपासना भी वैशाख माह में की जाती है. वैशाख माह में पवित्र नदियों में स्नान ध्यान दान-पुण्य करने से जीवन में आई समस्त बाधाएं दूर होती हैं. तो वहीं दूसरी तरफ इसी वैशाख माह में रवि की फसल की कटाई भी शुरू होती है. इसके साथ ही इसी माह में सूर्यदेव की तपन भी शुरू होती है.

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