सनातन धर्म में भगवान शिव को पूजने वाले असंख्य भक्त हैं. भोलेनाथ अपने भक्तों द्वारा चढ़ाए एक लोटा जल से भी प्रसन्न हो जाते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि जलाभिषेक के समय महादेव की कृपा पाने के लिए किस मंत्र का जाप करना चाहिए? इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा. साथ ही बता रहे हैं उन वस्तुओं के बारे में जिन्हें भगवान शिव पर अर्पित नहीं करना चाहिए.
इस मंत्र का करें जापधार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान भोलेनाथ की कृपा पाने के लिए जलाभिषेक करते समय भक्तों को ‘श्रीभगवते साम्बशिवाय नमः। स्नानीयं जलं समर्पयामि’ मंत्र का जाप करना चाहिए. इस मंत्र के उच्चारण से महादेव प्रसन्न होते हैं और भक्तों को मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद देते हैं.
शक्तिशाली मंत्र का जापधार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव को जल अर्पित करते समय इस बेहद शक्तिशाली मंत्र का जाप करना शुभ और लाभकारी माना जाता है. ‘ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात.’ ये शिव गायत्री मंत्र कहलाता है. जिसका अर्थ है मुझे महान पुरुष महादेव पर ध्यान केंद्रित करने दें. भगवान भोलेनाथ मुझे उच्च बुद्धि प्रदान करें मेरे दिमाग को रोशनी दें.
टूटा चावलधार्मिक ग्रंथों में बताया गया है कि भगवान शिव को कभी भी टूटा चावल अर्पित नहीं करना चाहिए. पूजा पाठ में चावल का विशेष महत्व है, लेकिन अगर चावल टूटा हो तो उसे अपूर्ण और अशुद्ध माना जाता है. टूटे चावल को कोई भी भगवान स्वीकार नहीं करते.
तिल और तिल से बनी चीजेंधार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव को भूल कर भी तिल या फिर तिल से निर्मित वस्तुएं नहीं चढ़ाना चाहिए. ऐसा करने से महादेव नाराज हो सकते हैं. प्रचलित मान्यताओं के अनुसार तिल भगवान विष्णु के मैल से उत्पन्न माना जाता है.
सिंदूर, तुलसी, हल्दी और केतकी के फूलभोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए कई फूल पत्ती चढ़ाने का विधान धार्मिक ग्रंथों में बताया गया है. परंतु धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव को भूलकर भी सिंदूर, केतकी के फूल, तुलसी और हल्दी नहीं चढ़ाना चाहिए. ऐसा करने से महादेव रुष्ट हो सकते हैं और आपके बनते काम बिगड़ सकते हैं.










