50 साल में घट गया महाकाल का शिवलिंग, गर्भ गृह में प्रवेश पर लग सकती है रोक

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उज्जैन. उज्जैन के महाकाल मंदिर में गर्भगृह में भक्तों के प्रवेश पर प्रतिबंध लग सकता है. आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) और जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जीएसआई) की समिति ने इसकी सिफारिश की है. भक्तों के हाथों महाकाल के अभिषेक और स्पर्श के कारण शिवलिंग का लगातार क्षरण हो रहा है. इस पर जीएसआई ने चिंता जताई है और गर्भ गृह में भक्तों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की सलाह दी है.

जीएसआई कि समिति ने चिंता जताई है कि महाकालेश्वर मंदिर के गर्भ गृह में शिवलिंग चरण को लेकर गर्भ ग्रह में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की सलाह दी है क्या अब भक्त और भगवान के बीच में दूरी बनेगी या फिर लगातार श्रद्धालु भगवान महाकाल को स्पष्ट कर पाएंगे यह फैसला मंदिर समिति को करना है।

अभिषेक और स्पर्श से क्षरण
उज्जैन 12 ज्योतिर्लिंग में से एक महाकालेश्वर मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है. लेकिन महाकालेश्वर मंदिर के शिवलिंग का लगाता क्षरण यानि वो घिस रही है. इसकी बड़ी वजह भक्तों के हाथों शिवलिंग पर दूध-घी जल सहित अन्य सामग्री से अभिषेक और स्पर्श है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बनी आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) और जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जीएसआई) की समिति ने इस पर चिंता जताई है. उसने गर्भगृह में लोगों का प्रवेश प्रतिबंधित करने की सलाह दी है. उज्जैन कलेक्टर कुमार पुरुषोत्तम ने कहा कि शिवलिंग चरण रोकने के लिए माननीय न्यायालय के आदेश का पालन किया जा रहा है. लेकिन महाकालेश्वर मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है. गर्भ गृह में अब सिर्फ तीन चार दिन ही भक्तों का प्रवेश होता है. लेकिन लोग कहते हैं कि सात होना चाहिए. बाकी दिनों में सीमित 2000 लोगों को प्रवेश देती है.

स्पर्श पूजा और रगड़ने से ज्योतिर्लिंग को काफी नुकसान
उज्जैन महाकाल मंदिर का जीएसआई की टीम ने साल 2019 में निरीक्षण कर सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट सौंपी थी. उसके बाद दिसंबर 2022 में जीएसआई समिति ने निरीक्षण किया था. उसने पाया कि 2021 में दिए गए कई सुझावों पर अमल नहीं किया गया है. शिवलिंग पर भस्म का गिरना और श्रद्धालुओं की स्पर्श पूजा और रगड़ने से ज्योतिर्लिंग को काफी नुकसान हुआ है. महाकाल के शिवलिंग को रगड़ने, भस्म गिरने और स्पर्श पूजा से ज्योतिर्लिंग पर छोटे-छोटे छिद्र बन गए हैं, और ये बढ़ रहे हैं. इससे बैक्टीरिया पनपते हैं, जिससे क्षरण हो रहा है. जीएसआई रिपोर्ट के मुताबिक शिवलिंग का आकार 50 साल में धीरे-धीरे घटा है.

सबको मिलकर लेना होगा फैसला
उज्जैन कलेक्टर और महाकालेश्वर मंदिर समिति के अध्यक्ष कुमार पुरुषोत्तम ने कहा उज्जैन महाकाल मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है. श्रद्धालुओं की संख्या भी बढ़ी है. इसके पहले भी शिवलिंग क्षरण को लेकर ASI की रिपोर्ट आई थी. समिति इसकी नियमित तौर पर मॉनेटरिंग करा रही है. शिवलिंग का क्षरण हुआ है. मौके पर दिखता भी है. इसके लिए हमें जीएसई की तरफ से कई सुझाव दिए गए थे. उसका पालन हम कर रहे हैं. कलेक्टर ने बताया कि शिवलिंग के अभिषेक में मिनरल वॉटर का इस्तेमाल किया जा रहा है.

श्रद्धालुओं की इच्छा के आगे बेबस
मंदिर समिति प्रशासक कलेक्टर पुरुषोत्तम कुमार ने कहा-हर श्रद्धालु की भावना है और हर श्रद्धालुओं की इच्छा होती है शिवलिंग का स्पष्ट करें. रोज हजारों श्रद्धालु यहां आते हैं. लोग प्रतिदिन पूजा करेंगे तो शिवलिंग को नुकसान होगा ही. सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हम पालन कर रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट के आदेश और एएसआई की रिपोर्ट का पालन करने के लिए हमें ,मिलकर निर्णय लेना होगा.

गर्भगृह में रोक का फैसला
कलेक्टर ने कहा अभी महाकाल फेस टू का काम चल रहा है. लगातार निर्माण कार्य जारी रहने के कारण मंदिर में प्रवेश के रास्ते बार बार बदलने पड़ते हैं. उसके कारण भी कई असुविधा हैं. उम्मीद करते हैं अगस्त से सारी सुविधाओं को ऊंचे लेवल पर ले पाएंगे.

 

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