आईएफएस दिव्या ने पहले नियमितीकरण किया लेन-देन का आरोप लगने पर अपना ही आदेश को किया खारिज अब गेंद हाईकोर्ट के पाले में।

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बिना अनुमति आपरेटर को दे दिए लाखो रुपये

वन विद्यालय में लंबे समय तक पदस्थ अनियमित ऑपरेटर वेद प्रकाश शर्मा ने हाईकोर्ट में परमानेंट करने हेतु याचिका क्रमांक WPS2742/2009 दायर किया था। जिसके बाद हाईकोर्ट ने वेद प्रकाश शर्मा के पक्ष में फैसला देते हुए आदेश जारी किया था। कोर्ट के आदेश के परिपालन में विभागीय अनुमति व उच्च कार्यालय के मार्गदर्शन के बाद ही वेद प्रकाश शर्मा का नियमितीकरण किया जाना था परंतु संभागीय मुख्यालय में स्थित वन विद्यालय संचालक दिव्या गौतम द्वारा नियमों व प्रक्रिया को तार-तार करते हुए अवैधानिक तरीके से बिना विभागीय अनुमति के वेद कुमार शर्मा को नियमित कर दिया। वही कंप्यूटर ऑपरेटर शर्मा का लंबित भुगतान बीस लाख रुपये का भुगतान भी खुद आहरित कर करवा दिया। मामले में लेनदेन का आरोप लगने के बाद दिव्या गौतम ने आनन-फानन में खुद का आदेश निरस्त करते हुए शर्मा का नि यमितिकरण खारिज कर दिया। इसके बाद आपरेटर शर्मा ने हाईकोर्ट में रिपीटीशन क्रमांक WPS6341/22022 दायर किया है, जो न्यायालय के विचाराधीन है।

मामला उजागर होने पर वन विभाग द्वारा संबंधित मामले में जांच का आदेश दिया गया था। परंतु अब तक कोई भी कार्रवाई नहीं हुई है। इस गंभीर लापरवाही के बावजूद अधिकारी से स्पस्टीकरण तक न लेना आश्चर्यजनक व दुर्भाग्य की पराकाष्ठा है। बता दे कि मौजूदा संचालक वन विद्यालय और प्रभारी सामाजिक वानिकी दिव्या गौतम और विवादों का चोली दामन का साथ रहा है। उन पर विभाग के अधीनस्थ अधिकारी कर्मचारियों से गालीगलौच करने से लेकर बंगले में काम करने वाले चौकीदार से मारपीट जैसे आरोप लगते रहे है। इस पर तुर्रा यह कि विभागीय वरिष्ठ अधिकारी हर मामले में धृतराष्ट्र की भूमिका में नजर आ रहे।

 

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