पेंड्रारोड रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर गौरेला करने की मांग

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गौरेला। छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले के नगर विकास समिति ने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर जोन के बिलासपुर कटनी रेल खण्ड के सबसे महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन पेंड्रारोड का नाम बदलकर गौरेला करने की मांग की है। इसे लेकर समिति ने बिलासपुर से लोकसभा सांसद व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव को रेलमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि, गौरेला नगर के नाम से हमारे इतिहास, सांस्कृतिक प्रचीनता का बोध होता है। प्राचीन काल में यहां बड़ी संख्या में गायों का पालन होता था। कभी यहां गायों का रेला लगता था। इसलिए पशुपालन के गौरव को अपने नाम का बोध कराते हुए नगर का प्राचीन नाम गौरेला रखा गया था।

बताया जाता है कि, अंग्रेजों की बांटो और राज करो की कूटनीति के कारण स्टेशन के नामकरण में गौरेला की विरासत को मिटाते हुए स्टेशन का नाम आठ किलोमीटर दूर जमींदारी से जोड़ते हुए पेण्ड्रारोड रख दिया गया। तब से गौरेला एक नगर के दो नामों की त्रासदी झेल रहा है। लोगों की मांग है कि हमें हमारे प्राचीन प्रतीक से पहचाना जाए। इसी क्रम में गौरेला और पेण्ड्रारोड के प्रचलन को एक संबोधन मात्र गौरेला किया जाए।

बता दें कि, इसके पहले गौरेला जनपद पंचायत के प्रतिनिधियों की ओर से सर्वसम्मति से गौरेला नाम करने का प्रस्ताव पारित कर दिया है। जल्द ही गौरेला नगर पंचायत भी इस पर एक प्रस्ताव पारित करने जा रही है। बड़ी संख्या में क्षेत्रवासियों ने नाम बदलने की अपनी मांग को सांसद के समक्ष रखा। इस पर सांसद ने भी अपनी प्राथमिक सहमति देते हुए कहा कि, जल्द वे नाम परिवर्तन को लेकर रेलमंत्री से चर्चा करेंगे। वहीं स्थानीय नागरिकों ने पूरी-बीकानेर, शालीमार-भुज, जबलपुर-संतरागाछि और रानी कमलापति-संतरागाछि एक्सप्रेस ट्रेनों के स्टॉपेज की मांग भी सांसद अरुण साव से की है।

 

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