बिलासपुर जिले में कम बारिश की वजह से खेत सूखने लगे है, जिसके चलते किसानों को सिंचाई की चिंता सताने लगी है। उनकी मांग पर खूंटाघाट और घोंघा जलाशय की नहरों से आज पानी छोड़ने का आदेश जारी किया गया है। कलेक्टर ने गुरुवार तक किसानों के लिए दोनों डैम से पानी छोड़ने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही पानी की सिंचाई के दौरान नहर काटने की शिकायत न हो, इसके लिए अफसरों को पेट्रोलिंग करने के लिए कहा गया है।
इस बार मानसून भी देर से आया और बारिश भी नहीं हुई। इसके चलते किसानों को धान की फसल लगाने की पद्धति में बदलाव करना पड़ा। प्री मानसून बारिश होने के बाद ज्यादातर किसान खुर्रा बोनी करते हैं। लेकिन, इस बार किसानों ने ऐसा नहीं किया और बारिश का इंतजार करते रह गए। बारिश नहीं होने के कारण किसानों को बोनी के बजाए रोपाई करना पड़ रहा है। लेकिन, मानसून की वर्षा में अनिश्चितता और खण्ड वर्षा के साथ ही तेज धूप की वजह से खेतों में धान की बोआई और रोपाई नहीं हो पा रहा है। पानी की कमी से धान की फसल पिछड़ रही है।
किसानों ने बांध से पानी छोड़ने की थी मांग
जिला जल उपयोगिता समिति के अध्यक्ष और कलेक्टर के निर्देश पर और जनप्रतिनिधियों, कृषकों की मांग पर खूंटाघाट और घोंघा जलाशय से पानी छोड़ने का निर्णय लिया है। अल्पवर्षा की स्थिति को देखते हुए खूंटाघाट जलाशय के बांई तट नहर में और दांई तट नहर और जल संसाधन संभाग कोटा के अंतर्गत घोंघा जलाशय के नहरों में खरीफ सिंचाई के लिए गुरुवार सुबह 11:00 बजे बिल्हा, मस्तूरी और कोटा विकासखण्ड के ग्रामों में खरीफ सिंचाई के लिए मुख्य नहर के वितरक शाखा, उपशाखा नहरों से पानी छोड़ा जाएगा।
सिंचाई विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों को पेट्रोलिंग करने दिए निर्देश
जिले में बारिश कम होने के कारण खेतों में कृषि काम प्रभावित हो रहा है और पानी की कमी से धान की फसल पिछड़ रही है। ऐसे में जलाशयों से पानी छोड़ना जरूरी हो गया है। मुख्य नहर के अंतिम छोर तक सिंचाई के लिए मैदानी अमलों को लगातार पेट्रोलिंग के निर्देश दिए गए हैं। क्षेत्र के कृषकों से सहयोग की अपील करते हुए पानी औक नहर को सुरक्षित रखते हुए आवश्यकतानुसार पानी का उपयोग करने का आग्रह भी किया गया है। मछली मारने वालों एवं अन्य असामाजिक तत्वों द्वारा रात में नहर के पानी चोरी को रोकने के लिए पेट्रोलिंग करने निर्देश दिए गए हैं। नहर पाटने या पम्प या किसी अन्य माध्यम से अवैधानिक रूप से सिंचाई करने पर नियमानुसार कानूनी कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी गई है।
दोनों बांध में है 60% से ज्यादा पानी
खारंग जलाशय में फिलहाल पूर्ण क्षमता का 78.60 प्रतिशत जलभराव मौजूद है। वहीं, घोंघा जलाशय में 62 प्रतिशत उपलब्ध है। पिछले साल बारिश में दोनों बांध लबालब हो गए थे और टेल एरिया से पानी छलक रहा था। इस बार कम बारिश होने के कारण बांध अभी 60% से ज्यादा ही भर सका है।










