भ्रष्टाचार की जांच के पूर्व ही, संलिप्त अधिकारी-कर्मचारी दहशत में
बालोद (छत्तीसगढ़ तहलका)। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशा के अनूुरूप विकास कार्यों के लिए विभिन्न मदों के अंतर्गत वन विभाग के माध्यम से होने वाले निर्माण कार्यों के लिए शासन द्वारा भरपूर धनराशि स्वीकृत की जाती है ताकि प्रदेश के उन क्षेत्रों का विकास हो सके जहां तक विकास की धारा पहुंच नहीं पाई है। सरकार की मंशा तब सफल होगी जब इन राशियों का ईमानदारी से उपयोग किया जाए। लेकिन देखा जा रहा है कि सरकार की योजनाओ में पलीता लगाने में कुछ भ्रष्ट लोगों ने कमी नहीं की है। धन कमाने की लालसा इतनी बढ़ गई है कि अच्छा बुरा कुछ भी समझ नहीं आ रहा है। ऐसा ही मामला वन वृत्त दुर्ग के वन मंडल राजनांदगांव अधिनस्थ वन परिक्षेत्रों में हुए विकास कार्यों में भ्रष्टाचार के मामले सामने आए हैं। छत्तीसगढ़ तहलका राष्ट्रीय समाचार पत्रिका के शिकायत के बाद भ्रष्टाचार की जांच प्रारंभ हो चुकी है, जांच प्रारंभ होने के बाद विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। भ्रष्ट और अवैध साधनों के जरिए अर्जित आय के संबंध में समय-समय पर विधायिका से विशिष्ट प्रावधान बनाए जा रहे हैं। इस अपराध को रोकने के लिए सरकार से प्रयास किया जा रहा है। भ्रष्टाचार दीमक की तरह है, ये देश और अर्थव्यवस्था को खोखला करने का कार्य कर रहा है। भ्रष्टाचार रोकने के लिए वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों में कठोर दंड का प्रावधान होना चाहिए। भ्रष्टचार मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। वन वृत्त दुर्ग के वन मंडल राजनांदगांव एवं अधिनस्थ वन परिक्षेत्रों में फैले भ्रष्टाचार की कोई सीमा नहीं लगातार भ्रष्टाचार के मामले सामने आ रहे हैं विभिन्न मदो के तहत होने वाले कार्यों में हुए करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार और आय से अधिक अर्जीत की गई संपत्ति के लिए जांच समिति गठित हुई थी ,गठन के बाद जांच समिति में भी अज्ञात कारणों से फेरबदल की कोशिश की गई बावजूद इसके वर्तमान परिस्थिति में जांच प्रारंभ हो चुकी है। जांच में भ्रष्ट कारनामों में आयेंगे चौकाने वाले तथ्य।

शिकायत के आधार पर जांच के कुछ बिंदु :-
विभाग द्वारा किस तरह और किन-किन मदों पर खुलकर भ्रष्टाचार किया गया जिसकी बानगी इस तरह हैं- नरवा विकास योजना के अंतर्गत तालाब निर्माण, चेक डेम, मिट्टी चेक डेम, एनीकट, पडल ट्रेंच, कंटुर ट्रेंच, डबरी निर्माण के आधे-अधूरे कार्य के बावजूद भुगतान पूरा कर दिया है, उच्च अधिकारियों द्वारा जो निर्माण पूर्व में हो चुके हैं उसे दिखाकर वाहवाही लूटी जाती है। इसी तरह मजदूरों के भुगतान में भी काफी घालमेल दिखाई दे रहा है। विभागीय एवं कैम्पा मद के तहत होने वाले विभिन्न निर्माण कार्य अधूरे पड़े हुए हैं जिनका भुगतान पूरा कर दिया गया है। इसी तरह एनआर/आर.डी.एफ. कार्यों में सुनियोजित तरीके से रकबा के विरुद्ध 100 गुना अधिक प्राक्कलन तैयार कर उसकी स्वीकृति कराई गई एवं ठेकेदारों को सप्लाई आदेश जारी किया गया, इसमें भी बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार किया गया है। नियम विरुद्ध जाकर बारबेट वायर, फेंसिंग पोल की खरीदी एवं गुणवत्ता विहिन कार्य के माध्यम से भ्रष्टाचार किया गया है। मजदूरों के भुगतान में मजदूरों की सूची की जांच में मानक दिवस के एक ही दिनांक में कई कार्यों की मजदूरी वसूल किया गया है। संयुक्त वन प्रबंधन समितियों से मत्स्य पालन, फर्नीचर खरीदी, बोर खनन एवं श्रमिक सुरक्षा सहित अन्य कार्यों में समितियों से कोटेशन के माध्यम से प्रस्ताव पास कराकर करोड़ों रुपये की राशि का आहरण कर भ्रष्टाचार किया गया। इसी तरह कृष्णकुंज पार्क, आक्सी वन उद्यान राजनांदगांव, टप्पा में निर्माणाधीन उद्यान, नगर निगम क्षेत्र में पौधा रोपण कार्य, वन चेतना केंद्र मनगट्टा में करोड़ों रुपये के कार्य का ठेका अपने चहेतों को प्रदान कर उन्हें लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया। ठेकेदारों के द्वारा स्वयं प्राक्कलन तैयार कर दो लाख के कार्यों को दस लाख का कार्य स्वीकृत कराकर वन मंडल कार्यालय का एक वर्ष में तीन बार पेंटिंग कार्य, टाईल्स फिटिंग कार्य तो प्रथम दृष्टया ही लाखों रुपये का भ्रष्टाचार दिखाई देता है। इसी तरह कार्यालय निरीक्षण कुटीर के सामने गार्डन निर्माण में लैंड स्केपिंग, घास रोपण, सीमेंट चेयर, स्टील रेलिंग, जैसे कार्यों में लाखों का भुगतान किया गया। डीएफओ बंगले में मुरुम पटाई का भुगतान ही लाखों में हुआ है। और तो और निरीक्षण कुटीर की इलेक्ट्रानिक सामग्रियों में बंदरबांट आसानी से दिखाई देता है, जिसमें खरीदी 10 गुना अधिक कीमत पर की गई है। मानचित्र कार्यालय, मीटिंग हाल निर्माण, बड़े अधिकारी की चेम्बर में अनाप शनाप राशि खर्च की गई है। मनमाने ढंग से कोटेशन कार्य में जो खरीदी की गई है वह स्टोर पंजी में दर्ज ही नहीं कर कार्यादेश से सीधा भुगतान किया गया है। कार्य समय समाप्त होने पर सामग्री एवं मजदूरों के व्हाउचर तैयार किया जाते हैं। पीडी खाते से कोटेशन के माध्यम से सामग्री खरीदी एवं मजदूरी में भुगतान कर होने वाले भ्रष्टाचार को काले से सफेद किया जाता गया है। सामग्री प्रदाय एवं निर्माण कार्यों हेतु कार्यादेश तो जारी किया जाता है लेकिन बिना किसी कारण के कार्यादेश निरस्त कर दिया जाता है। काष्ठागार एवं वनोपज की कूप कटाई एवं चट्टा लगाने के कार्य तथा लैंटाना एवं छिंद उन्मूलन के भुगतान में भी भारी भ्रष्टाचार किया गया है। इसके अलावा बहुत से ऐसे बिंदु हैं जिसकी जांच के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय रायसीना हील नई दिल्ली, महामहिम राज्यपाल (छ.ग.), मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री छ.ग. शासन, प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन/बल, अरण्य भवन रायपुर। आयकर विभाग छ.ग., जिलाधीश महोदय, राजनांदगांव, मुख्य वन संरक्षक क्षेत्रीय कार्यालय दुर्ग, शिकायत सतर्कता विभाग अरण्य भवन रायपुर, पुलिस महानिरीक्षक महोदय, दुर्ग रेंज, जिला-दुर्ग। पुलिस अधीक्षक राजनांदगांव, जिला- राजनांदगांव को शिकायत पत्र प्रेषित किया गया है।
शिकायतकर्ता को झूठे, मनगढ़ंत व फर्जी प्रकरण में फंसाने का अंदेशा
शिकायकर्ता छत्तीसगढ़ तहलका राष्ट्रीय पत्रिका के संपादक एम.ए.रिजवी द्वारा यह आशंका जाहिर की है कि उक्त शिकायत जांच के संबंध में मुख्य वन संरक्षक क्षेत्रीय कार्यालय दुर्ग द्वारा जांच समिति गठन कर निष्पक्ष जांच प्रारंभ करने निर्देशित किया गया तथा जांच प्रारंभ होने के पूर्व ही वन मंडल राजनांदगांव एवं परिक्षेत्रों में हड़कम्प मचा हुआ है जिसके चलते शिकायतकर्ता द्वारा यह आशंका जाहिर की गई है कि शिकायतकर्ता द्वारा कराई जा रही भ्रष्टाचार की जांच को प्रभावित करने के लिए मुझे झूठा, मनगढ़ंत एवं फर्जी प्रकरण में न फंसा दे इस संबंध में इत्तेलाई (पूर्व) सूचना प्रधानमंत्री कार्यालय रायसीना हील नई दिल्ली, महामहिम राज्यपाल (छ.ग.), मुख्य सचिव, मुख्यमंत्री छ.ग. शासन, प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन/बल, अरण्य भवन रायपुर, जिलाधीश महोदय, राजनांदगांव, मुख्य वन संरक्षक क्षेत्रीय कार्यालय दुर्ग, शिकायत सतर्कता विभाग अरण्य भवन रायपुर, पुलिस महानिरीक्षक महोदय, दुर्ग रेंज, जिला-दुर्ग। पुलिस अधीक्षक राजनांदगांव, जिला- राजनांदगांव एवं संबंधित थाना प्रभारी को सूचित करते हुए इत्तेलाई (पूर्व) सूचना पत्र प्रेषित किया गया।
और यह भी…..
चूंकि शिकायतकर्ता द्वारा पूर्व में भी वनमंडल राजनांदगांव के अंतर्गत तेंदूपत्ता गोदाम, ट्रस पर्लिंन के संबंध में जांच प्रारंभ कराई गई थी लेकिन जांच के पूर्व ही शिकायकर्ता को जान से मारने की धमकी एवं झूठे प्रकरण में फंसाने प्रयास किया गया था। इसी आशंका को देखते हुए शिकायकर्ता ने इस प्रकरण में भी आशंका जाहिर की है और मुख्य रूप से पुन: वनमंडल राजनांदगांव एवं अधिनस्थ वन परिक्षेत्रों में होने वाली जांच में अगर शिकायकर्ता को किसी भी प्रकार की जान-माल, घटना, दुर्घटना घटित होती है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी वर्तमान में पदस्थ वनमंडलाधिकारी राजनांदगांव की होगी का भी लेख किया गया है।










