वन विभाग द्वारा उच्च न्यायालय के स्थगन आदेश की अवमानना

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स्थानांतरित प्रार्थी लगा रहा कार्यालय के चक्कर

रायपुर। वन विभाग में जो न हो वह कम है चाहे वह निर्माण कार्य हो, खरादी-बिक्री का मामला हो या अधिकारी कर्मचारियों के स्थानांतरण पोस्टिंग का मामला कोई न कोई ऐसा मामला सामने जरूरत आता है जिसमें या तो कार्य में अव्यवस्था होती है या भ्रष्टाचार या फिर अधिकारियों और कर्मचारियों के पोस्टिंग और स्थानांतरण का मामला हो। समझ यह नहीं आ रहा है कि विभाग में बैठे उच्च लोगों द्वारा अपने इगो के चलते नीचे के लोगों के साथ किस प्रकार अन्याय होता है इस प्रकार का मामला एक बार फिर प्रकाश में आया जिसमें स्थानांतरित व्यक्ति द्वारा उच्च न्यायालय से प्राप्त स्थगन के बावजूद प्रभार नहीं देने का मामला सामने आया है।

वन विभाग द्वारा जारी स्थानांतरण आदेश दिनांक 01.08.2023 एवं 29.09.2023 के विरुद्ध माननीय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में अधिकारी/कर्मचारियों ने याचिका दायर की थी जिस पर उच्च न्यायालय में याचिकाकर्ता के पक्ष में स्थगन आदेश पारित किया था। जिसके एवज में विभाग को निर्देश दिया गया था कि प्रस्तावित पदस्थापना यथावत रखा जावे। उक्त संदर्भ में याचिकाकर्ता मुनीर खान ने अपने पदस्थापना क्षेत्र केशकाल परिक्षेत्र (सामान्य) का प्रभार दिलाने के संबंध में अपर सचिव छ.ग. शासन वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग का पत्र क्रमांक/3476 नया रायपुर में दाखिल किया था। लेकिन आज दिनांक तक प्रार्थी को प्रभार प्राप्त नहीं हुआ है। वन विभाग में अव्यवस्था, तानाशाही पूर्व रवैया के समाचार लगातार प्रकाशित होते रहते हैं। विभागीय कार्य प्रणाली से जहां अधिकारी कर्मचारी प्रताडि़त होते रहते हैं इसका हश्र यह होता है कि विभागीय कर्मचारी हमेशा दबाव में काम करते हैं और कार्य सुचारू रूप से चलने की बजाय दबाव के चलते उल्टे सीधे काम होते रहते हैं। सेवा निवृत्ति के मात्र दो माह बचने रहने वाले कर्मचारी को प्रभार नहीं देना सरासर अन्याय कहा जा सकता है। मामला यह है कि मुनीर खान वन क्षेत्रपाल परिक्षेत्र अधिकारी केशकाल, (सामन्य) वन मण्डल केशकाल का स्थानांतरण आदेश दिनांक 29.09.2023 को परिक्षेत्र अधिकारी केशकाल (सामान्य) परिक्षेत्र, वनमण्डल केशकाल से प्रभारी परिक्षेत्र अधिकारी, चारामा, वन मण्डल कांकेर में किया गया था।

उक्त आदेश के विरूद्ध मुनीर खान द्वारा उच्च न्यायालय में एक रिट याचिका प्रश्तुत किया गया था जिसकी सुनवाई 12.10.2023 को उच्च न्यायालय द्वारा की गई. उच्च न्यायालय ने सुनवाई करते हुए मुनीर खान के पक्ष में स्थगन आदेश पारित करते हुए विभाग के समक्ष विस्तृत अभ्यावेदन प्रस्तुत करने हेतु आदेशित किया है। मुनीर खान ने छत्तीसगढ़ शासन वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग मंत्रालय महानदी में अभ्यावेदन प्रस्तुत करते हुए लिखा है कि प्रार्थी की सेवानिवृत्ति दा ेवर्ष से कम समय होने की वजह से स्थानांतरण आदेश दिनांक 29.09.2023 पर पुनर्विचार करते हुए मुझे पुन: वन मण्डल केशकाल में ही पदस्थ रहने दिया जावे। यह कि आवेदक प्रार्थी की जगह सेवक राम ठाकुर को स्थानांतरित किया जा रहा है। सेवक राम ठाकुर वर्तमान में परिक्षेत्र अधिकारी केशकाल (उत्पादन) वन मण्डल केशकाल में पदस्थ हैं अत: सेवक राम ठाकुर का स्थानांतरण वन मण्डल केशकाल के एक ही परिक्षेत्र में किया जा रहा है। आवेदक मुनीर खान स्पाइनल की समस्या से ग्रसित है और ऐसी स्थिति में स्थानांतरण किया जाना स्वास्थ्य कारणों से भी उचित प्रतीत नहीं होता है तथा मेरा गृह जिला कांकेर है और मेरा स्थानांतरण केशलकाल कोण्डागांव ससे चारामा कांकेर में किया गया है। प्रार्थी द्वारा वन विभाग में लगभग 30 वर्षों का सेवाकाल रहा है और अपने सभी स्थानांतरण का आदेश पालन किया है अत: ऐसी स्थिति में सेवा निवृत्ति के अंतिम दो वर्षा से कम समय शेष होने से स्थानांतरण आदेश निरस्त किये जाने हेतु सहानुभूति पूर्वक विचार करने की मांग की है।

उस विषय में माननीय उच्च न्यालय छत्तीसगढ़ का आदेश क्र./ङ्खक्कस् हृश. ८२31शद्घ 2023 दिनांक 12.10.203 के तहत स्टे (स्थगन) मिल गया है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि No coercive steps shill be taken against the petioner pursunat to the Impugned order deted 29.09.2023 (Annexure P-1)) अत: उपरोक्त संदर्भित आदेश के तह केशकाल वन परिक्षेत्र (सामान्य) का प्रभार दिलाने हेतु प्रतिवेदन प्रस्तुत किया है। लेकिन आज दिनांक तक मुनीर खान को प्रभार प्राप्त नहीं हुआ है।

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