राज्य में कामधेनु विश्वविद्यालय एकमात्र ऐसा विश्वविद्यालय है, जहां सेवानिवृत्ति की आयु पूरी करने के बाद भी कुलपति पद पर आसीन व्यक्ति अपनी पुरानी संस्था से पेंशन लेते रहे हैं और नई संस्था से कुलपति पद का वेतन।
इस तरह वह वेतन और पेंशन दोनों का लाभ प्राप्त करते रहे हैं। वहीं अन्य विश्वविद्यालयों में कुलपतियों को उनके पद का वेतन दिया जाता है। जिस संस्था में वह बतौर प्राध्यापक सेवाएं दे रहे होते हैं, वहां से 65 साल की आयु पूरी करने के बाद सेवानिवृत्त होने पर पेंशन की राशि नहीं मिलती।
एक ही राज्य के विश्वविद्यालयों में कुलपति के वेतन संबंधी दो अलग-अलग नियम होने की वजह से अक्सर दुविधा का स्थिति निर्मित होती रही है। इसे देखते हुए अब कुलपति के वेतन और पेंशन संबंधी नियम में संशोधन किया जा रहा है। इसके लिए मंगलवार को दोपहर 3 बजे कामधेनु विश्वविद्यालय की आपात बैठक बुलाई गई है।
इसमें कुलपतियों के वेतन और भत्ते संबंधी धारा 5.3 (1) में संशोधन किया जाएगा। इसके अलावा पिछले दिनों बतौर दैनिक वेतन भोगी सेवाएं दे रहे जिन कर्मचारियों को नियमित किया गया है, उन्हें शासकीय सेवकों के तरह पेंशन की पात्रता देने पर विचार -विमर्श किया जाएगा। नियमों में संशोधन होने की स्थिति में हाल ही में नियमित हुए विभिन्न वर्ग के कर्मचारियों को लाभ होगा।
डॉ. बघेरवाल ने कुलपति और कार्य परिषद के सदस्यों को लिखी है चिट्ठी
वैसे इस मामले को लेकर पशु चिकित्सा एवं पशुपालन महाविद्यालय महू (इंदौर) के पशु औषधि विभाग के अध्यक्ष डॉ. आरके बघेरवाल ने 24 जुलाई को वर्तमान कुलपति और कार्यपरिषद के सदस्यों को चिट्ठी लिखकर नियम में संशोधन की मांग की थी। उन्होंने इसमें लिखा है कि कुलपति को प्राप्त होने वाले मूल वेतन में से कुल पेंशन की राशि की कटौती के उपरांत ही मासिक वेतन का निर्धारण किया जाए। साथ ही इस संबंध में विश्वविद्यालय के अधिनियम और राजपत्र में संशोधन किया जाए। इससे हर साल करीब 18 लाख रुपए और कुलपति के कार्यकाल में करीब एक करोड़ रुपए की शासन को बचत होगी।
दोनों नियमों में संशोधन करने सदस्यों के बीच चर्चा
कुलसचिव डॉ. आरके सोनवाने ने बताया कि कुलपति के वेतन निर्धारण संबंधी नियम और दैनिक वेतन भोगी से नियमित हुए कर्मचारियों के पेंशन निर्धारण संबंधी नियम पर विचार विमर्श के बाद संशोधन करने के लिए 22 को कार्य परिषद की आपात बैठक बुलाई गई है। बैठक में होने वाले फैसले के बारे में राजभवन को जानकारी दी जाएगी। इसके बाद वहां से अंतिम फैसला लिया जाएगा।









