
बालोद शहर में चल रहे डिवाईडर नाली निर्माण कार्य और हाईस्कूल मैदान की दुर्दशा …. जिम्मेदार कौन ?
यह स्थिति अत्यंत गंभीर है और स्कूल मैदान के दुरुपयोग की सीमा को और भी स्पष्ट रूप से उजागर करती है। निर्माण एजेंसी न केवल मैदान पर कार्य सामग्री डंप कर रही है, बल्कि भारी मशीनरी और वाहनों का भी उपयोग कर रही है, जो कि सार्वजनिक और शासकीय संपत्ति के नियमों का सीधा उल्लंघन है।

कार्य एजेंसी द्वारा हाईस्कूल मैदान का किया जा रहा दुरुपयोग
सामग्री का अनाधिकृत डंपिंग:
रेत, गिट्टी, सीमेंट, और सरिया जैसी निर्माण सामग्री को बिना अनुमति के स्कूल मैदान पर रखा जा रहा है। भारी मशीनरी का संचालन कर मैदान का उपयोग कर हाईवा, JCB, रोलर, मिक्सर मशीन, और अन्य भारी वाहनों की पार्किंग/संचालन के लिए किया जा रहा है।जिससे मैदान की दुर्दशा हो गई है इस भारी दबाव और सामग्री के कारण मैदान पूरी तरह से कीचड़खाना बन गया है, जिससे उसकी प्राकृतिक उपयोगिता (खेल के मैदान के रूप में) समाप्त हो गई है।

कार्य एजेंसी द्वारा शासकीय संपत्ति का उल्लंघन:
शासकीय संपत्ति (स्कूल मैदान) का उपयोग व्यावसायिक निर्माण कार्यों के लिए गैरकानूनी तरीके से किया जा रहा है, जबकि एजेंसी को इसके लिए अपनी निजी या किराए की जगह का उपयोग करना चाहिए यह स्पष्ट उल्लंघन दर्शाता है कि ठेकेदार को न तो नियमों की परवाह है, और न ही बच्चों और खिलाड़ियों के हितों की। इस पर तुरंत जिला शासन व प्रशासन को इस गंभीर उल्लंघन पर आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए और साथ ही कार्य एजेंसी को तत्काल कानूनी नोटिस भेजने के साथ साथ स्कूल प्रबंधन/संस्थापक को तुरंत निर्माण एजेंसी को कानूनी नोटिस जारी करने आदेशित करते जिसमें मैदान से सभी सामग्री और मशीनरी को तुरंत हटाने और मैदान में हुए नुकसान की भरपाई (Demages) कार्य एजेंसी से करनी चाहिए क्योंकि एजेंसी ने जानबूझकर शासकीय संपत्ति का दुरुपयोग किया है, जो ठेके की शर्तों का उल्लंघन भी है। कार्य एजेंसी बिना अनुमति के मैदान का उपयोग कर रही है, जिससे मैदान कीचड़खाना बन गया है जबकि कार्य एजेंसी को निर्माण कार्य के लिए उपयोग में आने वाली सामाग्रियों जैसे रेत,गिट्टी,सीमेंट,सरिया व उपयोग में लाई जा रही हाईवा,JCB,रोलर, मिक्सर मशीन व अन्य वाहनो के उपयोग को शासकीय संपत्ति या स्कूल मैदान का उपयोग नही किया जा सकता परंतु कार्य एजेंसी द्वारा खुलकर इसका इस्तेमाल किया जा रहा है

साथ ही मुख्य कार्यपालन अभियंता लोक निर्माण विभाग को भी एक नोटिस जारी की जानी चाहिए की उन्होंने हाईवा और JCB जैसी भारी मशीनरी के मैदान में प्रवेश और सामग्री डंपिंग को क्यों नहीं रोका? यह उनकी मॉनिटरिंग में घोर लापरवाही को सिद्ध करता है।
छात्र छात्राओं और खिलाड़ियों पर असर:
बच्चे खेल खेलने से वंचित हैं, और खिलाड़ियों की भावनाएँ आहत हो रही हैं। यह बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक संसाधन का हनन है जिस ओर शासन/प्रशासन को ध्यान देना अतिआवश्यक है।

कार्यबल का अभाव:
शहर के मुख्य विकास कार्य को पूरा करने के लिए केवल “चंद मजदूरों” को लगाया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि एजेंसी काम को जानबूझकर खींच रही है या उसके पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं।काम में अनावश्यक देरी हो रही है, जिससे परियोजना की लागत बढ़ सकती है और नागरिकों को लंबे समय तक असुविधा झेलनी पड़ रही है। यह स्थिति बालोद के नागरिकों, खासकर बच्चों और खिलाड़ियों के लिए घोर निराशाजनक है और इस पर त्वरित, कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की आवश्यकता है।
हाईस्कूल मैदान का गंभीर दुरुपयोग और दुर्दशा
कार्य एजेंसी बिना अनुमति के मैदान का उपयोग कर रही है, जिससे मैदान कीचड़खाना बन गया है और कार पार्किंग के रूप में भी इस्तेमाल हो रहा है। इसके अलावा, स्कूल संस्थापक/प्रबंधन द्वारा भी मैदान की देखरेख का अभाव है।

प्रशासनिक ढिलाई और जवाबदेही का अभाव
निर्माण एजेंसी पर “शासन की मेहरबानी” स्पष्ट नजर आ रही है, जिसका अर्थ है कि मुख्य कार्यपालन अभियंता लोक निर्माण विभाग सहित संबंधित सरकारी अधिकारी या विभाग काम की निगरानी में निष्क्रिय हैं और एजेंसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की जा रही है जिससे कार्य एजेंसी के हौसले बढ़े हुए हैं।
रावण दहन के कार्यक्रम में बाधा:
दशहरा जैसे महत्वपूर्ण पर्व पर, जब सामुदायिक आयोजन के लिए मैदान की आवश्यकता होती है, निर्माण सामग्री और भारी वाहनों का रखा जाना आयोजन को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है।
आधे से भी कम स्थान पर कार्यक्रम हो रहा है। इससे दर्शकों के लिए कुर्सियां और बैरिकेड्स लगाने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं हो पा रही होगी, जिससे भीड़ को नियंत्रित करने और लोगों के आराम से देखने में भारी परेशानी हो सकती है।
सुरक्षा का खतरा:
कार्यक्रम स्थल सीमित जगह में अधिक भीड़ होने से सुरक्षा का खतरा बढ़ जाता है ? खासकर रावण दहन के दौरान।
परंपरा और उत्साह पर असर:
वर्षों से चली आ रही धूमधाम और भव्यता में कमी आने से स्थानीय लोगों के पर्व के उत्साह पर बुरा असर पड़ता है।
इस तरह के सार्वजनिक मैदानों को निजी या व्यावसायिक उपयोग से बचाना अत्यंत आवश्यक है। यह सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है कि सार्वजनिक संपत्ति का उपयोग सार्वजनिक हित के लिए ही हो।

कार्य एजेंसी के ऊपर दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए:
प्रशासन से माँग है की इस अनधिकृत उपयोग के लिए निर्माण एजेंसी पर कठोर आर्थिक जुर्माना (Heavy Fine) लगाया जाए और मैदान को उसके मूल स्वरूप में बहाल करने की पूरी लागत एजेंसी से वसूल की जाए।
इस तरह का दुरुपयोग न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है, बल्कि बच्चों के खेल के अधिकार का सीधा हनन है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।







