
यह एक प्रशासनिक और विभागीय जांच का मामला है जिसमें व्यय शाखा प्रभारी के द्वारा दस्तावेजों की अनुपलब्धता के कारण विलंब हो रही है।
शिकायत:
तहलका पत्रिका द्वारा वित्तीय वर्ष 2021-22 में दुर्ग रेंज के पुलगांव स्थित केंद्रीय नर्सरी में हुए भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े की शिकायत 15/07/2025 को वन मंडलाधिकारी (DFO) दुर्ग के समक्ष की गई।
प्रथम जांच आदेश: DFO दुर्ग ने 25/07/2025 को उप वन मंडलाधिकारी (SDO) दुर्ग को जांच अधिकारी नियुक्त किया और 07 दिन के भीतर रिपोर्ट मांगी गई।
जांच में विलंब का कारण:
जांच अधिकारी SDO दुर्ग ने 18/08/2025 को व्यय शाखा प्रभारी को दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए पत्र लिखा और मौखिक रूप से भी कहा, लेकिन 40 दिनों के बाद भी दस्तावेज नहीं मिले। शिकायत में आरोप है कि व्यय शाखा प्रभारी जानबूझकर दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा रहे हैं और उच्च अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना कर दोषियों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं।
शिकायतकर्ता की पुनः भेंट और नया आदेश:
शिकायतकर्ता रिज़वी ने 08/10/2025 को DFO से मिलकर विलंब की शिकायत की। DFO दुर्ग ने उसी दिन (08/10/2025) पुनः जांच अधिकारी को पत्र जारी कर 05 दिन के भीतर स्पष्ट जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया।
जांच अधिकारी का अगला कदम:
DFO के नए आदेश के बाद, जांच अधिकारी (SDO) ने पुनः व्यय शाखा प्रभारी को दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए कहा।
इस स्थिति में जांच में मुख्य बाधा व्यय शाखा प्रभारी द्वारा दस्तावेजों को उपलब्ध न कराना है।
यह पूरा मामला स्पष्ठ रूप से प्रशासनिक आदेशों की अवहेलना और जांच में बाधा उत्पन्न करने का है।
अब देखना ये है की व्यय शाखा प्रभारी का अगला कदम क्या होगा।
स्थिति का विश्लेषण और कानूनी निहितार्थ
गंभीर अनुशासनहीनता:
व्यय शाखा प्रभारी ने न केवल जांच अधिकारी के अनुरोध की उपेक्षा की है, बल्कि वन मंडलाधिकारी (DFO) जैसे उच्च अधिकारी के स्पष्ट आदेश (25/07/2025 का पत्र) की भी 40 दिनों से अधिक समय तक अवहेलना की है। यह अपने आप में एक गंभीर सेवा कदाचार (Service Misconduct) और अनुशासनहीनता का मामला बनता है।
दोषियों को बचाने का प्रयास:
शिकायत में किया गया आरोप (दोषियों को बचाने का प्रयास) महत्वपूर्ण है। यदि व्यय शाखा प्रभारी जानबूझकर दस्तावेज रोकते हैं, तो यह जांच में हस्तक्षेप (Interference in Investigation) माना जाएगा।
अंतिम चेतावनी और समय-सीमा: DFO का 08/10/2025 का नया आदेश (05 दिन में रिपोर्ट) एक तरह से व्यय शाखा प्रभारी के लिए अंतिम चेतावनी है। DFO ने सीधे जांच अधिकारी पर समय-सीमा निर्धारित की है, जिसका अर्थ है कि जांच अधिकारी को हर हाल में 05 दिन में रिपोर्ट देनी होगी।
अब क्या हो सकते हैं? (संभावित अगले कदम)
जांच अधिकारी (SDO) और वन मंडलाधिकारी (DFO) के पास इस विलंब को दूर करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण कदम संभावित यह हो सकते हैं?
1. जांच अधिकारी (SDO) का अंतिम कदम व विलंब की स्पष्ठ रिपोर्ट:
यदि व्यय शाखा प्रभारी DFO के नए आदेश के बाद भी (05 दिन की समय सीमा के भीतर) दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराते हैं, तो जांच अधिकारी (SDO) को अपनी जांच रिपोर्ट DFO को सौंपनी चाहिए तथा दस्तावेजों की अनुपलब्धता का उल्लेख करते हुए
इस रिपोर्ट में उन्हें स्पष्ठ रूप से लिखना चाहिए कि जांच व्यय शाखा प्रभारी द्वारा सहयोग न किए जाने और जानबूझकर दस्तावेज न देने के कारण अधूरी है, और यह भी उल्लेख करना चाहिए कि यह उच्च अधिकारी के आदेशों की स्पष्ठ अवहेलना है।
2. वन मंडलाधिकारी (DFO की ओर से कार्रवाई की संभावना:
अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करना एवं दायित्व:
रिपोर्ट मिलते ही, DFO को व्यय शाखा प्रभारी के खिलाफ उच्चाधिकारी के आदेश की अवहेलना और सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप में तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई (Disciplinary Action) शुरू की जा सकती है। (यदि दस्तावेज उपलब्ध नही कराये जाते हैं तो)
दस्तावेज जब्त करना:
DFO, प्रशासनिक प्रमुख होने के नाते, सीधे किसी अन्य कर्मचारी (जैसे कि एक वरिष्ठ लिपिक या एक प्रशासनिक अधिकारी) को व्यय शाखा से लिखित आदेश के तहत सभी आवश्यक दस्तावेज जब्त (Seize) करके जांच अधिकारी को उपलब्ध कराने का निर्देश दे सकते हैं? DFO को अब केवल व्यय शाखा प्रभारी पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। (यदि दस्तावेज उपलब्ध न करावें तो)
विलंब भी एक प्रकार का भ्रष्टाचार है, और इसे प्रभावी ढंग से उजागर करना आवश्यक है।







