भगवान श्रीकृष्ण के भक्त अपने प्रभु का जन्मोत्सव हर माह की अष्टमी को मनाते हैं. इस बार 12 मई को मासिक कृष्ण जन्माष्टमी मन रही है. ज्येष्ठ माह की मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का विशेष महत्व माना जाता है. मान्यता है कि मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का नियमपूर्वक व्रत करने से जीवन के सारे संकट दूर हो जाते हैं. सारे भय, क्लेश, दुखों का नाश हो जाता है. इंदौर निवासी पंडित नवीन उपाध्याय के मुताबिक मासिक कृष्ण जन्माष्टमी के दिन एकासना रहकर विधिपूर्वक व्रत का पालन करना चाहिए.
योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रापद के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को हुआ था. यही वजह है कि इस दिन कृष्ण जन्माष्टमी को मनाया जाता है. हर महीने इस तिथि का आगमन होता है, ऐसे में कृष्ण भक्त हर महीने अपने इष्ट की आराधना के लिए मासिक कृष्ण जन्माष्टमी को मनाते हैं. मूल तौर पर मासिक कृष्ण जन्माष्टमी भगवान कृष्ण की मासिक जयंती के तौर पर मनाई जाती है.
ज्येष्ठ माह में आने वाली मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का विशेष महत्व माना जाता है. पंडितों के अनुसार इस दिन नियमपूर्वक व्रत का पालन करने से जीवन में आने वाले संकटों से मुक्ति मिलती है. पंडित नवीन उपाध्याय बताते हैं कि मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत करने से जीवन में आने वाले और पहले से मौजूद सारे संकट दूर हो जाते हैं. इसके साथ ही व्रत करने से मन भयमुक्त भी बनता है.
मासिक कृष्ण जन्माष्टमी में एकासना व्रत का बेहद महत्व माना गया है. इस दिन पूरे दिन में सिर्फ एक बार ही भोजन करना चाहिए. हर तिथि के अलग-अलग देवता कहे गए हैं. अष्टमी का संबंध रूद्र से माना गया है. इस तिथि में व्रत करने से कृष्ण जी के साथ भगवान शंकर भी प्रसन्न होते हैं. अगर कोई व्यक्ति लंबे वक्त से कर्ज से परेशान है तो उसे मासिक कृष्ण एकादशी का व्रत करना चाहिए. इस व्रत को करने से रोगों से मुक्ति के साथ ही ऋण मुक्ति भी मिलती है.
मासिक कृष्ण जन्माष्टमी के व्रत को किसी भी कृष्ण पक्ष की अष्टमी से धारण किया जा सकता है. ज्येष्ठ महीने में कृष्ण जन्माष्टमी व्रत को धारण करने का विशेष महत्व माना गया है. व्रत के दौरान पूरे दिन अपने इष्ट का ध्यान करना चाहिए. इससे जीवन के समस्त भय, संकट, व्याधि, जरा और पीड़ा से मुक्ति प्राप्त होती है. पंडित उपाध्याय के अनुसार कृष्ण भक्त अपने इष्ट के जन्म की खुशी में हर महीने मासिक कृष्ण जन्माष्टमी को मनाते हैं.
मासिक कृष्ण जन्माष्टमी के संपूर्ण लाभ के लिए विधि-पूर्वक पूजा विधि का पालन करना चाहिए. इसके लिए सबसे पहले पूर्वाभिमुख बैठकर अपने ऊपर जल का सिंचन करना चाहिए. इसके बाद जल का तीन बार आचमन करें. आचमन के बाद दीपक जलाएं और उसे आग्नेय कोण में लगाएं. सर्वप्रथम गणेश जी का पूजन उसके बाद कलश का पूजन करें. उसके बाद भगवान कृष्ण और भोलेनाथ का पूजन करना चाहिए. पूरे दिन कृष्ण जी का स्मरण करना करणीय है.










