30 मई को है गंगा दशहरा, इस शुभ मुहूर्त में स्नान से होगी पुण्य की प्राप्ति

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गंगा दशहरा को पृथ्वी पर गंगा के अवतरण का दिन माना जाता है. गंगा दशहरा के दिन गंगा स्नान से विशेष पुण्य की प्रप्ति होती है. खास बात है कि गंगा दशहरा देश में मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहारों में से एक है. इस क्रम में उत्तर प्रदेश के प्रयागराज संगम तट पर भोर (तड़के) से ही श्रद्धालुओं का जमावड़ा लग रहा है. महिलाओं के समूहों ने मूर्ति की स्थापना कर पूजन-अर्चन शुरू किया. पवित्र स्थल दशाश्वमेध घाट पर पूजन अर्चन की प्रकिया चलती रही.

आचार्य लक्ष्मीकांत शास्त्री ने बताया कि गंगा दशहरा शुक्ल पक्ष दशमी 29 मई से शुरू हो कर उदयातिथि 30 मई दोपहर एक बजकर सात मिनट तक रहेगा. अतः गंगा दशहरा पर्व 30 मई को ही मनाया जाएगा. गंगा आरती में गंगाभक्त अनामिका चौधरी ने मां गंगा को चुनरी अर्पित कर सभी के कल्याण के लिये प्रार्थना किया. इसके बाद गंगा पुरोहित प्रमोद दुबे ने हवन कराया और मां गंगा की आरती उतारी. सभी को प्रसाद का वितरण किया गया.

सुख-समृद्धि की होती है प्राप्ति
अनामिका चौधरी ने बताया कि सनातन धर्म में गंगा नदी को माता का दर्जा प्राप्त है. गंगाजल को बहुत पवित्र और पूजनीय माना जाता है. बिना गंगाजल के कोई भी शुभ कार्य और अनुष्ठान संपन्न नहीं होता है. ज्येष्ठ (जेठ) मास के शुक्ल पक्ष दशमी के दिन ही गंगा जी का स्वर्ग से धरती पर अवतरण हुआ था. मां गंगा के पूजन से भगवान विष्णु भी प्रसन्न होते हैं. गंगा दशहरा से तात्पर्य है कि इन दिनों में गंगा में स्नान करने वालों का दस प्रकार के रोग, कष्ट दूर होते हैं और वो सुख-समृद्धि को प्राप्त कर लेते हैं.

 

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