हिन्दू धर्म में आषाढ़ महीने की पूर्णिमा को महत्वपूर्ण माना गया है. पूर्णिमा के दिन चन्द्रमा को अर्घ्य देने का महत्व है. कहा जाता है कि इसी दिन व्यास जी ने शिष्यों एवं मुनियों को सर्वप्रथम श्री भागवतपुराण का ज्ञान दिया था. अत: यह शुभ दिन व्यास पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है. वहीं आसाढ़ महीने की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा भी कहते है. इस दिन गुरु की पूजा होती है. अपने-अपने गुरु की पूजा कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए.
वहीं बैद्यनाथधाम ज्योतिषाचार्य पंडित नन्दकिशोर मुदगल ने बताया कि पंचांग के अनुसार, 02 जुलाई दिन रविवार की शाम 06 बजकर 02 मिनट पर आषाढ़ माह की पूर्णिमा तिथि की शुरू हो रही है. जोकि 03 जुलाई सोमवार की रात 11 बजकर 08 मिनट तक रहने वाली है. उदयातिथि को मानते हुए गुरु पूर्णिमा 03 जुलाई को मनाई जाएगी.
मुदगल ने कहा कि इस साल पूर्णिमा की शुरुआत होते ही भद्रा भी पड़ रहा है. जोकि 3 जुलाई की अहले सुबह 05 बजकर 07 मिनट मे समाप्त हो जाएगा. ऐसे तो भद्रा में पूजा पाठ की मनाही होती है. लेकिन इस साल भद्रा पाताललोक में वास कर रहा है. इसलिए पूजन में कोई दिक्क़त नहीं होगी. वहीं इस दिन मनिकर्निका घाट पर स्नान कर व्रत रखकर विष्णु भगवान की पूजन करने से सारी मनोकामनापूर्ण होती है.
चन्द्रमा को पड़ता है अर्घ्य:
पूर्णिमा के दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु या शालीग्राम की पूजन करनी चाहिए. इस दिन अन्न दान का भी महत्व है. अन्न दान करने से सारे कष्ट ख़तम हो जाते हैं. साथ ही इस दिन उदित चंद्रमां को अर्घ्य अर्पण करना चाहिए. इससे सभी कामनाएं पूरी होती हैं.










