तीर्थों का तीर्थ कही जाने वाली अमरनाथ गुफा महादेव के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक मानी जाती है. अमरनाथ गुफा का सनातन धर्म में विशेष महत्व है. हर वर्ष बड़ी संख्या में महादेव के भक्त उनकी एक झलक पाने के लिए दूर-दूर से आते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति बर्फानी बाबा के दर्शन कर लेता है. उसे शिव शंकर की विशेष कृपा प्राप्त होती है. लगभग 10 से 12 फीट ऊंचा बर्फ का शिवलिंग प्राकृतिक रूप से अमरनाथ गुफा में बनता है. दक्षिण कश्मीर के हिमालयवर्ती क्षेत्र में अमरनाथ गुफा स्थित है, जो श्रीनगर से लगभग 141 किलोमीटर की दूरी पर 3888 मीटर यानी 12756 फुट की ऊंचाई पर स्थित है. आज के इस आर्टिकल में भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा बता रहे हैं अमरनाथ यात्रा से जुड़े 5 रोचक तथ्य.
अमरनाथ गुफा से जुड़े 5 रोचक तथ्य
1. गुफा की लंबाई
अमरनाथ गुफा की लंबाई अंदर की तरफ 19 मीटर और 16 मीटर चौड़ी है. इस गुफा की ऊंचाई 11 मीटर है और यह लगभग 150 फीट के क्षेत्रफल में फैली हुई है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह वही गुफा है जहां भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरत्व का ज्ञान दिया था. भगवान भोलेनाथ खुद इस गुफा में विराजमान रहते हैं. यहां माता सती का कंठ भाग गिरा था. इसलिए इसे 51 शक्तिपीठों में से एक गिना जाता है.
2. एक मात्र बर्फ का शिवलिंग
कश्मीर में असंख्य धार्मिक तीर्थ है, जिनमें 45 शिव धाम, 3 ब्रह्मा धाम, 60 विष्णु धाम, 22 शक्ति धाम और लगभग 700 नाग धाम स्थित है. इन सभी में सबसे अधिक महत्व रखता है अमरनाथ धाम. कहा जाता है जो व्यक्ति काशी में शिवलिंग के दर्शन और पूजा करता है उसे 10 गुना फल प्राप्त होता है. परंतु अमरनाथ बाबा के दर्शन प्रयाग से 100 गुना और नैमिषारण्य से हजार गुना पुण्य देने वाले माने जाते हैं. कश्मीर का शासक सामदीमत के बारे में उल्लेख है कि वह भगवान शिव का बहुत बड़ा भक्त था. जो वनों में बर्फ से निर्मित शिवलिंग की पूजा आराधना करता था. बर्फ का शिवलिंग पूरी दुनिया में कश्मीर को छोड़कर कहीं भी नहीं मिलता है.
3. घटती-बढ़ती है बर्फानी बाबा की ऊंचाई
प्रचलित मान्यता के अनुसार, बर्फानी बाबा की ऊंचाई चंद्रमा के अनुसार घटती और बढ़ती रहती है. जब पूर्णिमा होती है तो शिवलिंग अपने पूरे आकार में होता है. वहीं अमावस्या के दिन शिवलिंग की आकृति कुछ कम हो जाती है. शिवलिंग पर लगातार बर्फ की बूंदे टपकती रहती हैं.
4. अमरनाथ गुफा का इतिहास
मान्यताओं के अनुसार अमरनाथ गुफा की खोज बुट्टा मलिक नाम के गडरिया द्वारा की गई थी. बुट्टा मलिक भेड़ चराते हुए बहुत दूर पहुंच गया. जहां उसकी मुलाकात एक साधु से हुई, उन्होंने बुट्टा मलिक को कोयले से भरा एक थैला दिया. मलिक ने जब उस थैले को घर जाकर देखा तो उसमें सोना था. कोयले को सोना बना देखकर वह चौक गया. बुट्टा मलिक वापस उस साधु की खोज में निकल गया. साधु को खोजते खोजते उसे अमरनाथ गुफा दिखाई दी लेकिन वहां साधु नहीं था. तभी से यह स्थान तीर्थ स्थान के रूप में प्रचलित हुआ.
5. अमरनाथ गुफा की प्रचलित कथा
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, अमरनाथ गुफा में भगवान शिव ने माता पार्वती को अमर कथा सुनाई थी. अमर कथा को कोई और जीव ना सुन सके इसलिए भगवान शिव में पंचतत्व वायु, जल, पृथ्वी, आकाश और अग्नि का परित्याग कर इन पर्वत मालाओं में पहुंचकर माता पार्वती को अमर कथा सुनाई. ये रहस्य माता पार्वती के साथ शुक (कबूतर) ने भी सुन ली. बाद में ये शुक, शुकदेव ऋषि के रूप में जानें गए.










