राज्य भर में बिजली कंपनी के 9 हजार अधिकारी और कर्मचारी हड़ताल पर रहेंगे। वे पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को बहाल करने की मांग कर रहे हैं। फिलहाल कंपनी कार्मिक नेशनल पेंशन स्कीम (एनपीएस) के दायरे में है। छत्तीसगढ़ राज्य पॉवर कंपनी में जनवरी 2004 के बाद से पुरानी पेंशन योजना की जगह एनपीएस लागू कर दी गई।
इसके विरोध में कंपनी के 9 विभिन्न यूनियन और संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। वे 19 जुलाई से विरोध प्रदर्शन करते हुए काली पट्टी लगा कर काम कर रहे हैं। 28 जुलाई को पुरानी पेंशन योजना लागू करने के लिए आमसभा करके पॉवर कंपनी में पुरानी पेंशन योजना बहाल करने के संबंध में संयुक्त मोर्चा के आव्हान पर 18 अगस्त को प्रदेश भर के विद्युत अधिकारी-कर्मचारी सामूहिक अवकाश की तैयारी में है।
अब तक 3 हजार से अधिक अफसर-कर्मचारियों ने सामूहिक अवकाश का आवेदन दे दिया है। इसके बाद भी कंपनी प्रबंधन द्वारा पुरानी पेंशन योजना बहाल करने के संबंध में सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता है, तो 6 सितंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी गई है। जिससे विद्युत व्यवस्था के ठप होने से अन्य कार्य क्षेत्रों में भी इसका विपरीत असर पड़ सकता है।
हड़ताल को श्रम न्यायालय ने अवैध घोषित किया
इधर श्रम न्यायालय रायपुर ने बिजली कर्मियों के संगठन छग पॉवर कंपनीज अधिकारी-कर्मचारी ओपीएस बहाली संयुक्त मोर्चा की प्रस्तावित 18 अगस्त के सामूहिक अवकाश सत्याग्रह को अवैध घोषित कर दिया है। श्रम न्यायालय ने 7 अगस्त को जारी आदेश में कहा है कि प्रस्तावित 18 अगस्त की हड़ताल से जनहित प्रभावित होने की आशंका से अवैध घोषित किया जाता है।
कर्मचारी- अधिकारी किसी भी हड़ताल सत्याग्रह में शामिल न हों। कंपनी ने छग औद्योगिक संगठन अधिनियम 1960 की धारा 167 सहपठित धारा 64 ए तहत वाद प्रस्तुत किया, जिसमें बताया गया कि प्रस्तावित हड़ताल से विद्युत आपूर्ति बाधित होगी तथा सामान्य जनजीवन प्रभावित होगा और जनसामान्य को समस्याओं से जूझना पड़ेगा। इससे अपूरणीय क्षति होने की आशंका है। श्रम न्यायालय ने मामले की त्वरित सुनवाई करते हुए हड़ताल को अवैध घोषित किया है।









