चन्द्रयान-3 की सफल लैंडिग, इंटनेशनल मीडिया में छा गया भारत, मिल रहीं खूब तारीफें

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भारत ने आखिरकार वो करिश्मा कर दिखाया है जो आजतक कोई अन्य देश नहीं कर सका। दरअसल, भारत चंद्रयान-3 की चंद्रमा पर सफल लैंडिंग साउथ पोल पर करवाने में कामयाब हो चुका है। इसी के साथ भारत पहला देश बन गया है जिसने साउथ पोल पर खुद को पहुंचाया। इसी के साथ ना सिर्फ भारत में जश्न का माहौल है, बल्कि बाहरी देशों में भी इस कामयाबी पर खुशी जाहिर की जा रही है।

इंटनेशनल मीडिया में छा गया भारत

वहीं इंटरनेशनल मीडिया में भी भारत की कामयाबी की जमकर प्रशंसा हो रही है। अग्रेजी अखबारों व न्यूज बेवसाइटों में शानदार हैडिंग में भारत का चंद्रयान पूरी तरह से छाया हुआ है। ब्रिटिश डेली न्यूज पेपर द गार्जियन ने तारीफों के पुल बांधे। उन्होंने लिखा कि भारत चांद के साउथ पोल पर पहुंचने वाला पहला देश बन गया। इसके अलावा सीएनएन ने भी प्रशंसा की। CNN – भारत चंद्रमा पर अंतरिक्ष यान उतारने वाला चौथा देश बन गया है।

तो वहीं रॉयटर्स की बेवसाइट ने इसे भारत के लिए ऐतिहासिक पल बताया। वाशिंगटन पोस्ट ने लिखा- बिना किसी अंतरिक्ष यात्री के भारत ने चंद्रमा की सतह पर यान उतारा।

न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा रूस की चन्द्रमा पर लैंडिंग विफल होने के कुछ दिनों बाद चंद्रमा की दक्षिणी सतह पर पहुंचने वाला पहला देश भारत है। भारत का चंद्रयान -3 मिशन चंद्रमा के उस क्षेत्र की खोज शुरू करने के लिए तैयार हैं।

पाकिस्तानी मीडिया डॉन – भारत का चंद्रयान-3 अंतरिक्ष यान चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरा

चांद पर पहुंचने वाला चौथा देश बना भारत

– 3 सितंबर, 1959 को रूस ने लूना 2 रॉकेट को चांद पर उतारा था।

– 20 जुलाई, 1969 को अमेरिका ने अपोलो 11 अभियान के तहत अमेरिकी अंतरिक्षयात्री नील आर्मस्‍ट्रांग को चांद पर भेजा था।

– 3 जनवरी, 2019 को चीन ने चांद के पिछले हिस्‍से में अपना चांगे-4 शोध यान उतारा था।

– 4 अगस्त, 2023 को भारत ने चांद पर चंद्रयान-3 को उतारा।

तीन बड़ी चुनौतियां को किया पार

– सबसे पहले लैंडर की स्पीड को कंट्रोल में रखा। पिछली बार तेज रफ्तार की वजह से लैंडर क्रैश हो गया था और इसरो से संपर्क टूट गया था, हाल ही में रूस के लूना-25 के साथ भी ऐसा ही हुआ।

– दूसरा सबसे बड़ा चैलेंज यह था कि लैंडर चंद्रयान-3 उतरते समय सीधा रहे। इसका सीधा चांद की सतह पर उतरना बेहद जरूरी है, वहीं तो संपर्क टूटने की आशंका है।

– वहीं तीसरी चुनौती थी कि ISRO द्वारा सेलेक्ट की गई जगह पर ही लैंडिंग हो। पिछली बार ऊबड़-खाबड़ जगह से लैंडर टकराने की वजह से चंद्रयान-2 क्रैश हो गया था।

 

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