हैदराबाद से सांसद और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। ओवैसी ने कहा कि चीन सीमा पर कोई बात क्यों नहीं करता है। सीमा पर यथास्थिति बहाल करने पर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हम 65 से 25 प्वॉइंट पर पेट्रोलिंग नहीं कर पा रहे हैं। सरकार को चीन के मामले पर संसद का विशेष सत्र बुलाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार सेना को कार्रवाई का आदेश देना चाहिए। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच दक्षिण अफ्रीका में एलएसी के मुद्दे पर चर्चा हुई है।
ओवैसी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्तारूढ़ दल जवाब देना चाहिए कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी “बातचीत के लिए चीनी राष्ट्रपति के पीछे क्यों भाग रहे हैं।” उन्होंने कहा कि चीन से लगी भारत की सीमा पर भूमि कथित रूप से खोने पर चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाया जाना चाहिए। उन्होंने यहां पत्रकारों से कहा, “यह लीक हो गया था कि चीन बात करना चाहता था। आधिकारिक तौर पर, विदेश मंत्रालय को प्रधानमंत्री मोदी और शी चिनफिंग की बातचीत के बाद बयान देना चाहिए था कि ये बातचीत हुई थी।
ओवैसी ने पूछा, “लद्दाख सीमा पर जो हो रहा है, उस पर प्रधानमंत्री देश को अंधेरे में क्यों रख रहे हैं?” उन्होंने पूछा, “क्या कारण है कि मोदी सरकार कोई समाधान स्वीकार करने के लिए हमारी बहादुर सेना पर दबाव डाल रही है।” ओवैसी ने कहा कि देश की बहादुर सेना पिछले 40 महीने से ऊंचे पहाड़ों पर चीन की सेना का सामना कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर देश ने अपना क्षेत्र खो दिया है और अगर भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार “चीन के सामने झुक रही है” तो यह शर्मनाक होगा। उन्होंने कहा, “जो 2,000 वर्ग किलोमीटर हमने खोया है, वह भाजपा की निजी संपत्ति नहीं है। वह हमारे देश की जमीन है। यह हमारे देश की सुरक्षा का अभिन्न अंग है।”
आपसी हित के लिए LAC का सम्मान जरूरी
बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शी से कहा सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बनाए रखना और एलएसी का सम्मान भारत-चीन संबंधों को सामान्य बनाने के लिए आवश्यक है। इस संबंध में, दोनों नेता अपने संबंधित अधिकारियों को सैनिकों की शीघ्र वापसी और तनाव कम करने के प्रयासों को तेज करने का निर्देश देने पर सहमत हुए। मोदी ने जोहानिसबर्ग में ब्रिक्स के शिखर सम्मेलन से इतर समूह के नेताओं के साथ बातचीत की। ऐसी जानकारी है कि मोदी और शी चिनफिंग ने बुधवार को बातचीत की।
दोंनो नेताओं के बीच LAC पर तनाव कम करने को लेकर बनी सहमति
मोदी ने शिखर सम्मेलन से इतर शी से बातचीत की और संबंधों को सामान्य बनाने के लिए वास्तविक नियंत्रण रेखा का सम्मान करने की महत्ता के साथ ही भारत की चिंताओं से उन्हें अवगत कराया। विदेश सचिव ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर अन्य ब्रिक्स नेताओं से बातचीत की।
चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग से बातचीत में प्रधानमंत्री ने भारत-चीन सीमा क्षेत्रों के पश्चिमी सेक्टर में एलएसी पर अनसुलझे मुद्दों पर भारत की चिंताओं का उल्लेख किया।” उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति एवं सामंजस्य बनाए रखना तथा एलएसी का सम्मान करना भारत-चीन संबंधों को सामान्य बनाने के लिए आवश्यक हैं।”
‘‘इस संबंध में दोनों नेता अपने संबंधित अधिकारियों को सैनिकों की शीघ्र वापसी और तनाव कम करने के प्रयासों को तेज करने का निर्देश देने पर सहमत हुए।” सरकार पूर्वी लद्दाख क्षेत्र को पश्चिमी सेक्टर कहती है। मई, 2020 में पूर्वी लद्दाख में सीमा पर गतिरोध शुरू होने के बाद भारत और चीन के बीच संबंध में तनाव पैदा हो गया।
भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच पूर्वी लद्दाख में कुछ स्थानों पर गतिरोध बना हुआ है, जबकि दोनों पक्षों ने व्यापक राजनयिक और सैन्य वार्ता के बाद कई क्षेत्रों से सैनिकों को पीछे हटाने की प्रक्रिया पूरी कर ली है। भारत और चीन ने 13 और 14 अगस्त को कोर कमांडर-स्तरीय वार्ता का 19वां दौर आयोजित किया, जिसमें पूर्वी लद्दाख के देपसांग और डेमचोक के गतिरोध वाले क्षेत्रों में लंबित मुद्दों को हल करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।










