रायपुर में 100 साल पहले हुई थी ईद-मिलाद-उन-नबी की शुरुआत

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छत्तीसगढ़ के रायपुर में ईद-मिलाद-उन-नबी का जलसा पिछले 100 सालों से मनाया जा रहा है। इस जलसे और जुलूस के संस्थापक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मौलाना हामिद अली फारूकी है। हामिद ने अपने साथियों हजरत गुल, हाशिम अय्यूब और मास्टर शमसुद्दीन के साथ मिलकर इसकी शुरुआत की थी।

कौन है मौलाना हामिद अली फारूकी ?

मौलाना हामिद अली फारूकी स्वतंत्र संग्राम सेनानी के साथ एक समाज सेवक थे। मुस्लिम समाज में शिक्षा को बढ़ावा देने का काम किया है। उनका जन्म 1989 में इलाहाबाद के चंदहा में हुआ था। 1920 में बरेली में उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद रोजी रोटी की तलाश में साल 1921 में बिलासपुर के अकलतरा आए थे।

कारोबार नहीं चला तो नमाज पढ़ाने लगे

उस समय यह क्षेत्र सीपी एंड बरार प्रांत में आता था। अकलतरा में ही फारूकी ने अपना कारोबार शुरू किया। काम नहीं जमने के कारण मस्जिद में ही नमाज पढ़ाने का काम करने लगे। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ फतवा भी जारी किया था।

आंदोलन के दौरान जाना पड़ा जेल

असहयोग आंदोलन के समय रायपुर में खिलाफत कमेटी बनाई गई थी। जिसमें पूरे छत्तीसगढ़ में हिंदू-मुस्लिम शामिल होकर आंदोलन कर रहे थे। मुंशी अब्दुल रऊफ के साथ मौलाना हामिद को गिरफ्तार कर लिया गया था। 11 जुलाई 1922 से 7 दिसंबर 1923 तक रायपुर की सेंट्रल जेल में बंद रहे।

जेल में कैदियों को दी शिक्षा

जेल में बंद रहते हुए शिक्षा के क्षेत्र में कार्य जारी रखा और अन्य कैदियों को शिक्षा देनी शुरू की। रिहा होने के बाद 1924 में रायपुर में मदरसा इस्लाहुल मुस्लिमीन मुस्लिम यतीम खान की शुरुआत की। यहां अनाथ बच्चों को मुफ्त में खाने रहने और शिक्षा देने का इंतजाम किया गया।

उर्दू स्कूल की स्थापना

आधुनिक शिक्षा के लिए मौलाना हामिद ने उर्दू एंग्लो स्कूल की स्थापना की थी। जिसमें छत्तीसगढ़ की लड़कियों को शिक्षा दी जाती थी। बैजनाथपारा में लड़कियों की शिक्षा के लिए शाम के समय पढ़ाई की व्यवस्था और लाइब्रेरी की शुरुआत की थी। आज भी मदरसे में 50 बच्चे शिक्षा ले रहे हैं। उनके रहने और खाने की निशुल्क व्यवस्था है।

जवाहरलाल नेहरू से थे घनिष्ठ संबंध

मौलाना हामिद अली देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के बहुत करीबी थे। पंडित नेहरू कई बार उन्हें अपने दौरे में साथ ले जाया करते थे। जरूरी विषयों पर विचार विमर्श भी करते थे। चुनावी क्षेत्र फूलपुर (तत्कालीन समय इलाहाबाद जौनपुर संसदीय क्षेत्र) में नेहरू के साथ वे सभा को भी संबोधित करते थे।

1968 में हुआ था निधन

हामिद अली ने मुस्लिम और गैर मुस्लिम समाज के लिए बहुत से कार्य किए। 25 अप्रैल 1968 को उनका इंतकाल हो गया था। आज भी शैक्षणिक और सामाजिक क्षेत्र में उनके योगदान को याद किया जाता है।

इन रास्तों से निकलेगा जुलूस

ईद-मिलाद-उन-नबी का पर्व पैगंबर हजरत मोहम्मद के जन्मदिन जयंती पर मनाया जाता है। शहर के अलग-अलग स्थान से जुलूस निकालते हैं। रायपुर में अलग-अलग इलाकों से निकलने वाले जुलूस बैजनाथ मदरसा चौक में एकत्र होंगे।

बैजनाथ पारा से जुलूस निकलकर मालवीय रोड, जयस्तंभ चौक तात्यापारा, आजाद चौक, सदर बाजार सिटी कोतवाली और बैजनाथ पारा से होते हुए सीरत मैदान पहुंचेगा। मैदान में परचम कोसाई की जाएगी।

रंग बिरंगी रोशनी से सजा रायपुर

ईद मिलाद-उन-नबी के मौके पर शहर की जिन सड़कों से जलसा गुजरेगा उन्हें रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया है। शहर के कई मुस्लिम बहुल इलाकों को रोशनी से जगमगा दिया गया है। बैजनाथपारा, छोटापारा, मौदहापारा, संजय नगर, मोवा, चांदनी चौक क्षेत्र में सड़कों को आकर्षक सजावट से सजाया गया है।

 

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