बालोद शहर के मुख्य मार्ग पर डिवाईडर व नाली निर्माण कार्य से नागरिक व व्यापारीगण निराश…

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बालोद शहर के नागरिकों और व्यापारियों की गंभीर पीड़ा को “तहलका पत्रिका” हमेशा ही बहुत मजबूती से सामने रखते आई है।

निर्माण कार्य की यह स्थिति अब सरदर्द बन चुकी है, जिसके लिए “तहलका पत्रिका का लेख” ही डिस्प्रिन का काम कर सकता है,

यानी जनता की आवाज को प्रशासन तक पहुंचाने का एकमात्र तेज और प्रभावी माध्यम बन सकता है।

बालोद शहर के विकास कार्य बने आमजन के लिए अभिशाप

1. त्योहारी सीजन की अनदेखी
यह अत्यंत निराशाजनक है कि नवरात्रि, दशहरा और दीपावली जैसे बड़े और महत्वपूर्ण पर्वों को भी पूरी तरह से अनदेखा कर दिया गया है। यह वह समय होता है जब व्यापारी साल भर की सबसे अच्छी बिक्री की उम्मीद करते हैं और आमजन उत्साह से खरीदारी करते हैं। निर्माण कार्य की धीमी गति ने इस अवसर को बर्बाद कर दिया है, जिससे व्यापारी भारी नुकसान झेल रहे हैं और लोगों का उत्साह भंग हुआ है।

2. ‘कछुआ चाल’ बनी मुसीबत
निर्माण की धीमी गति: डिवाइडर व नाली निर्माण कार्य की गति इतनी धीमी है कि इसे ‘कछुआ चाल’ कहना भी गलत नहीं होगा। इस कछुआ चाल ने पूरे शहर के जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है।

सड़कों का हाल बेहाल: शहर के सभी चौक-चौराहों की सड़कें बदहाल हैं। रोड के बीचोंबीच हुए गहरे गड्ढे दुर्घटनाओं को न्योता दे रहे हैं। आमजन और छात्र-छात्राओं को प्रतिदिन जान जोखिम में डालकर आवागमन करना पड़ रहा है।

3. व्यापार और दैनिक जीवन प्रभावित
सबसे बड़ी समस्या दुकानों व घरों के सामने नाली की खोदाई से उत्पन्न हुई है।
व्यापार में बाधा: खोदाई के कारण ग्राहक दुकानों तक नहीं पहुँच पा रहे हैं, जिससे व्यापार करने में भारी परेशानी हो रही है।
जान जोखिम में खरीदारी: लोगों को जान जोखिम में डाल कर अपनी जरूरत का सामान खरीदना पड़ रहा है। यह स्थिति दिखाती है कि प्रशासन ने सुरक्षा मानकों की पूरी तरह से उपेक्षा की है।

4. जनप्रतिनिधियों की चुप्पी
इस गंभीर संकट पर

जनप्रतिनिधियों का मौन रहना और भी अधिक चिंताजनक है। ऐसा प्रतीत होता है कि वे जनता की समस्याओं से विमुख हो गए हैं। उनकी यह चुप्पी नागरिकों के विश्वास को ठेस पहुँचा रही है।
शासन को तुरंत देना होगा ध्यान
आपकी यह आवाज़ प्रशासन के लिए एक चेतावनी है। शासन को तुरंत हस्तक्षेप कर निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए:
निर्माण कार्यों में गति: ‘कछुआ चाल’ की जगह काम को युद्ध स्तर पर शुरू किया जाना चाहिए और एक सख्त समय-सीमा तय करनी चाहिए।

सुरक्षा और सुगमता: खोदाई वाले क्षेत्रों में पर्याप्त बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड और अस्थाई पुलियों की व्यवस्था की जाए ताकि आमजन और व्यापारी सुरक्षित रूप से आवागमन कर सकें।

जवाबदेही तय करना:

निर्माण एजेंसी की लापरवाही पर सख्त कार्रवाई करते हुए उनकी जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।
यह स्थिति सचमुच “शब्द नहीं, चित्र” की मांग करती है, जिसे ‘तहलका पत्रिका’ जैसे माध्यम से तस्वीरों के साथ प्रकाशित कर प्रशासन को नींद से जगाना बेहद जरूरी है।

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