हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को गंगा सप्तमी मनाई जाती है. इस तिथि तिथि को गंगा की उत्पत्ति हुई थी, इसलिए इस दिन गंगा जयंती मनाते हैं. गंगा सप्तमी के दिन गंगा नदी में स्नान करते हैं, मां गंगा की पूजा करते हैं, जिससे व्यक्ति पापों से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त करता है. इस साल गंगा सप्तमी पर 3 शुभ योग बन रहे हैं. गंगा सप्तमी को गंगा जयंती के नाम से भी जानते हैं, जबकि गंगा दशहरा को गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था. तिरुपति के ज्योतिषाचार्य डॉ. कृष्ण कुमार भार्गव से जानते हैं गंगा सप्तमी कब है? गंगा जयंती पर बनने वाले 3 शुभ योग और पूजा का मुहूर्त.
गंगा सप्तमी 2023 तिथि मुहूर्त
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, इस साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि 26 अप्रैल दिन बुधवार को सुबह 11 बजकर 27 मिनट पर शुरू होगी और इस तिथि की समाप्ति 27 अप्रैल गुरुवार को दोपहर 01 बजकर 38 मिनट पर होगी. ऐसे में गंगा सप्तमी 27 अप्रैल को मनाई जाएगी.
गंगा सप्तमी 2023 पूजा मुहूर्त
27 अप्रैल को गंगा सप्तमी का पूजा मुहूर्त 11 बजे से लेकर दोपहर 01 बजकर 38 मिनट तक है. इस समय में आप गंगा स्नान, पूजा और दान कर सकते हैं.
गंगा सप्तमी पर 3 शुभ योग
इस साल गंगा सप्तमी पर तीन शुभ योग बन रहे हैं. गंगा सप्तमी को पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग है, वहीं अमृत सिद्धि योग सुबह 07 बजे से लेकर अगले दिन 28 अप्रैल को सुबह 05 बजकर 43 मिनट तक है. तीसरा गुरु पुष्य योग भी सुबह 07:00 बजे से लेकर अगले दिन सुबह 05:43 बजे तक है. गुरु पुष्य योग खरीदारी के लिए बड़ा ही शुभ माना जाता है. गंगा सप्तमी पर सुबह 7 बजे तक पुनर्वसु नक्षत्र है और उसके बाद से पूरे दिन पुष्य नक्षत्र है.
पौराणिक कथा के अनुसार राजा भगीरथ के कठोर तप से प्रसन्न होकर ब्रह्म देव ने उनकी मनोकामना पूर्ण करने का वरदान दिया. राजा भगीरथ मां गंगा को धरती पर लाना चाहते थे ताकि उनके 60 हजार पूर्वजों को मोक्ष मिल सके. ब्रह्म देव ने भगीरथ से कहा कि वे गंगा को धरती पर भेज सकते हैं, लेकिन पृथ्वी गंगा के भार और वेग सहन नहीं कर पाएगी.
तब ब्रह्म देव के सुझाव पर भगीरथ ने अपने तप से भगवान शिव को प्रसन्न किया और उनसे वरदान मांगा कि पृथ्वी पर अवतरित होने से पूर्व मां गंगा आपकी जटाओं से होकर गुजरें, ताकि उनका वेग कम हो जाए और वे आसानी से धरती पर अवतरित हो जाएं. शिवजी ने उनको वरदान दे दिया.
तब वैशाख शुक्ल सप्तमी को ब्रह्म देव ने अपने कमंडल से गंगा की उत्पत्ति की. मां गंगा तीव्र वेग से बहते हुए भगवान शिव के जटाओं में उतर गईं. तब महादेव ने उनको अपनी जटाओं में बांध लिया. वैशाख शुक्ल सप्तमी को गंगा की उत्पत्ति हुई, लेकिन वे पृथ्वी पर अवतरित नहीं हुईं. फिर भगीरथ ने शिव जी की तपस्या की तो उन्होंने गंगा को धीरे-धीरे मुक्त किया, जिससे वह गंगा दशहरा पर धरती पर अवतरित हुईं. इस साल गंगा दशहरा 30 मई को है.







