कैसे बनी मंथरा रामायण की मुख्य पात्र, क्या थी उनकी भूमिका? क्यों थी कैकेयी की प्रिय दासी

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रामायण काल में ऐसे बहुत से चरित्र थे जो बहुत प्रसिद्ध हैं. रामायण का नाम आते ही हमारी आंखों के सामने उसके चरित्र किरदार मंडराने लगते हैं. इन्हीं में से एक है मंथरा. माना जाता है कि रामायण में भगवान राम के वन जाने का मुख्य कारण दासी मंथरा ही थी. वाल्मीकि रामायण में भी मंथरा को बहुत अधिक महत्वपूर्ण बताया गया है. मंथरा का चरित्र रामायण की कथा को बदल देता है. मंथरा के कारण ही भगवान राम को 14 वर्षों का वनवास मिला. ऐसे में सवाल उठता है, कि मंथरा आखिर कौन थी ? रामायण में उसकी भूमिका इतनी खास क्यों बताई गई है? और वह कैकेयी प्रिय दासी कैसे बनी?

कथाओं के अनुसार अश्वपति सम्राट की पुत्री का विवाह राजा दशरथ के साथ हुआ. तो दासी मंथरा उनके साथ मायके से आई थी. बताया जाता है कि मंथरा ने कैकेयी को बाल्यवस्था से अपनी बेटी की तरह पाला था. रामायण में कैकेयी को सुंदर और वीरांगना स्त्री बताया गया है. कैकेयी राजा दशरथ की सबसे प्रिय रानी भी कही जाती हैं.

कथाओं में वर्णन मिलता है कि कैकेयी के पिता के भाई की बेटी रेखा और कैकेयी बचपन में बहुत अच्छी दोस्त थीं. रेखा बहुत बुद्धिमान थी, उसे बचपन में एक रोग हो गया था. जिसके चलते उसका पूरा शरीर पसीने से भीग जाता था और उसे खूब प्यास भी लगती थी. एक दिन रेखा ने अपनी प्यास बुझाने के लिए पानी में इलायची, मिश्री और चंदन मिलाकर शर्बत बनाकर पी लिया. इस शरबत को पीने से उसके शरीर के बहुत से अंगों ने काम करना बंद कर दिया था. रेखा के पिता ने उसका चिकित्सकों से उपचार करवाया. रेखा ठीक तो हो गई, लेकिन उसकी रीढ़ की हड्डी में दोष आ गया. उसकी रीढ़ की हड्डी सदैव के लिए ठेडी हो गई. कथाओं के अनुसार रेखा ही मंथरा थी. रीढ़ की हड्डी में दोष की वजह से उसका विवाह नहीं हो पाया और वह कैकेयी के विवाह के साथ उनकी दासी बनकर अयोध्या आ गई.

कथाओं के अनुसार कैकेयी युद्ध विद्या में निपुण थी. वह राजा दशरथ के साथ एक युद्ध में कहीं थी जहां उन्होंने राजा दशरथ की जान बचाई थी. इसके बदले में राजा दशरथ ने उन्हें दो वरदान मांगने के लिए कहा. सालों बाद श्री राम के राज्य अभिषेक की बात मंथरा के कानों में पड़ी तो वह बेचैन हो गई. कुबड़ी मंथरा ने कैकेयी को ये समाचार सुनाया. यह सुनकर कैकेयी आनंद में डूब गई, क्योंकि राम उस समय सभी के प्रिय थे. मंथरा ने कैकेयी को राम के विरुद्ध खूब भड़काया, लेकिन कैकेयी मंथरा की बात नहीं मान कर आनंद में डूबी रहीं. तब मंथरा के बहकाने पर कैकेयी को अपने दो वरदान की याद आई. कैकेयी के मन में कपट समा गया. मंथरा के कहने पर वे कोप भवन में जाकर बैठ गईं. राजा दशरथ को अपने दो वरदान की याद दिलाई. राजा दशरथ ने कैकेयी से वह वरदान मांगने के लिए कहा, तब उन्होंने अपने वरदान के रूप में राम का वनवास और भरत के लिए राज्य मांगा. ये सुनकर राजा दशरथ भीतर से टूट गए.

 

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