मंत्री के विभागों में मचा हड़कंप, विभागों में होगा बड़ा फेरबदल
रायपुर। प्रदेश में 2023 का विधानसभा चुनाव संपन्न हो गया है प्रदेश में भाजपा की सरकार को बहुमत मिलने के साथ ही नए सरकार के गठन का कवायद भी शुरू हो गई है। सरकार गठन होते ही प्रशासनिक फैसला लेने की प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी। माना यह जा रहा है कि प्रशासनिक फेरबदल भी इसी माह किये जा सकते है। इसी कड़ी में आईएफएस अफसरो के प्रभार में भी बड़ा फेरबदल तय है। चुनाव के कुछ माह पहले ही आईएफएस वी. श्रीनिवास राव को पहले पीसीसीएफ और बाद में वन बल प्रमुख की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इस नियुक्ति के बाद आईएफएस अफसरों की नाराजगी भी सामने आई थी। दरअसल वरिष्ठता क्रम में छठवें नंबर के आईएफएस श्री राव को आधा दर्जन वरिष्ठ आईएफएस अफसरों में वरिष्ठता क्रम में पहले नंबर के आईएफएस सुधीर अग्रवाल एवं पीसीसीएफ स्तर के कई अफरों ने कैट में भी इस बात को लेकर चुनौती दी है। कैट से अभी आदेश नहीं हुआ है। संभव है सरकार उससे पहले ही फेरबदल का निर्णय ले सकती है।
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के कद्दावर नेता एवं कवर्धा प्रत्याशी अकबर चालीस हज़ार के रिकॉर्ड मतो से चुनाव हार गये हैं। कहा जाता है कि दबाव की राजनीति करने में माहिर अकबर अपने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तक को नहीं छोड़ते थे। पाँच साल तक छत्तीसगढ़ में स्थानीय लोगो को दबाने का काम करते रहे। इन पर मंत्री कम, ठेकेदारी करने तथा वन विभाग, आवास और परिवहन से कई हज़ार करोड़ वसूल के दुबई में अकूट संपत्ति बनाये जाने का आरोप लगता रहा है।
कहा तो यहां जा रहा है कि जब भी कांग्रेस को पैसों की ज़रूरत होती थी, यही फंडिंग करते थें। वनविभाग से तो इनेके विश्वस्त रहे श्रीनिवास राव हर महीने करोंड़ों रु.मंत्री तक पहुँचाने का मामला भी फिजा में है। बताने वाले तो यहां तक कहते हैं कि हैदराबाद में दो होटल,इंदौर में 1 होटल और बेंगलूरु के मॉल में भी दोनों की पार्टनरशिप हैं और हैदराबाद में ही श्रीनिवास राव ने बस तैयार करके रखी थी,ताकि पार्टी के जीते हुए सारे विधायक को छ.ग.से हैदराबाद ले जाकर वहां से कर्नाटक भेजवा सके,जिससे इनकी खरीद फरोख्त न हो सके। लेकिन इनकी सारी मंशा धरी के धरी रह गई।
सूत्रों के अनुसार 2023 विधानसभा के चुनाव में अकबर ने लगभग छत्तीसगढ़ के आधे से ज्यादा विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस प्रत्याशियों का चुनावी खर्च निकाला। इनके इसी प्रभाव के दम पर भूपेश बघेल और कांग्रेस पार्टी भी आंखें मूंदे रही। धर्मनगरी कवर्ध में बसाने के भी आरोप लगते रहे। सभी जि़लो में इन्होंने विभागीय पैसों के दम पर वन भूमि पर कब्जा भी करवाया हैं ताकि बाहरी लोगो को बसा के उनकी जनसंख्या बढ़ाया जा सके। इतनी बदनामी मंत्री के बावजूद कांग्रेस में इनका रूतबा कायम रहा कमजोरियों और बुराईयों को नजरअंदाज करने का नतीजा यह हुआ कि कांग्रेस का सफ़ाया हुआ। बीजेपी ने तो पाटन से ज़्यादा ताक़त कवर्धा में लगाया था। नतीजन अकबर की 40 हज़ार के वोटो से हार हुई। सरकार बदलने के साथ ही अब इसके सारे घपले घोटाले, अवैध वसूली की जाँच होने वाली हैं साथ ही इनके सभी अवैध होटल और प्रॉपर्टी पर भी बुलडोजऱ चलने की गुंजाई भाजपा सरकार में हो सकती है। अब देखना यह होगा कि वर्तमान शासन में बैठने वाली सरकार ऐसे भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों और नेताओं पर क्या कार्यवाही करती हैं। आने वाले समय में भाजपा सरकार द्वारा किये जाने वाले अधिकारी-कर्मचारियों के फेरबदल में इसका असर देखा जा सकेगा।
समय-समय पर अधिकारियों और मंत्रियों के खिलाफ भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े की शिकायत की गई लेकिन आज दिनांक तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। विभाग द्वारा जानबूझ कर जांच को लंबित किया जाता रहा है। अब सरकार बदलने के साथ यह उम्मीद की जा रही है कि वन विभाग में होने वाले फर्जीवाड़े में किये गये शिकायतों पर ध्यान देते हुए कार्रवाई की जावेगी।








