वन मंडल राजनांदगांव में चल रही अफसरशाही पर लगेगा अंकुश

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  • अधिकारियों पर गिरेगी गाज पांच वर्षो का आतंक होगा समाप्त 

  • प्रशासन में होगा बड़ा फेरबदल, लंबित मामलो पर शुरू होगी जांच

  • जांच के लिए समिति बदलती रही पर मामला ढाक के तीन पात

  • सत्ता बदलने के साथ ही जंगल में दहशत का आलम  

राजनांदगांव वन मण्डल में सुनियोजित एवं शडय़ंत्रपूर्वक निर्माण,सप्लाई कार्य में कैम्पा एवं विभागीय मद में करोड़ों रूपये भ्रष्टाचार की तत्काल प्रभाव से जांच कर आरोपित अधिकारी,कर्मचारीयों को छत्तीसगढ़ सिविल अधिनयम एवं संविदा तथा दै.वे.भो. को बर्खास्त करने की कार्यवाही के संबंध में 15 बिन्दुओं पर चांज करने हेतु शिकायत पत्र प्रस्तुत किया गया था। जिस संबंध में श्री बी.पी.सिंह मुख्य वन संरक्षक दुर्ग वृत्त दुर्ग के आदेश क्रमांक/470 दुर्ग दिनांक 26.06.2023 को चांच समिति गठन करते हुए अध्यक्ष संलग्नाधिकारी दुर्ग वृत्त दुर्ग एवं सदस्य उप वन मण्डलााधिकारी राजनांदगांव को अदेश जारी करते हुए उक्त तिथि से 15 दिवस के भीतर अनिवार्यत: इस कार्यालय में अपने स्पश्ट अभिमत सहित प्रस्तुत करने हेतु आदेशित किया गया परन्तु अज्ञात कारणों से निरस्त किया गया तथा पुन: श्री बी.पी.सिंह,भा.व.से. दुर्ग वृत्त दुर्ग के आदेश क्रमांक/482 दुर्ग दिनांक 06.07.2023 को जांच समिति में संशोधन करते हुए अध्यक्ष उप वन मण्डलाधिकारी खैरागढ़ एवं सदस्य उप वन मण्डलाधिकारी राजनांदगांव को उक्त तिथि से 15 दिवस के भीतर अनिवार्यत: इस कार्यालय में अपने स्पष्ट अभिमत सहित प्रस्तुत करने हेतु आदेशित किया गया। परन्तु उक्त जांच समिति अध्यक्ष एवं सदस्य द्वारा जांच प्रारंभ नही कि गई तथा श्री दिलराज प्रभाकर भा.व.से. मुख्य वन संरक्षक दुर्ग वृत्त दुर्ग के आदेश क्रमांक/627 दुर्ग दिनांक 11.09.2023 को पुन: नवीन जांच समिति गठन करते हुए अध्यक्ष वन मण्डलाधिकारी मोहला व सदस्य संलग्नाधिकारी दुर्ग वृत्त दुर्ग को उक्त तिथि से 15 दिवस के भीतर अनिवार्यत: इस कार्यालय में अपने स्पश्ट अभिमत सहित जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने हेतु आदेशित किया गया।

परन्तु उक्त गठित समिति के अध्यक्ष एवं सदस्य के द्वारा आदेश का पालन नही किया गया तथा आज दिनांक तक किसी भी प्रकार की जांच प्रारंभ नही कि गई है,इस प्रकार अधोहस्ताक्षरी को शिकायत जांच को लगभग छ: माह हो चुके है। आज दिनांक को इस मामले की शिकायत पीसीसीएफ वी.श्रीनिवास को करते हुए तत्काल प्रभाव से जांच प्रारंभ करने श्री रिजवी ने पुन: शिकायत दर्ज की है।

गौरतलब है वन विभाग में समय समय पर होने वाले भ्रष्टाचार एवं फर्जीवाड़ा की शिकायत छत्तीसगढ़ तहलका के संपादक एम.ए. रिजवी के द्वारा की जाती रही है  एवं दोषियों पर शासन के पैसे का दुरुपयोग एवं स्वयं को पहुंचाने वाले लाभ के संदर्भ में विभाग के उच्च अधिकारी से लेकर मंत्र तक शिकायत की गई थी लेकिन इसकी जांच आज दिनांक तक लंबित है।   ऐस ही मामला वन वृत्त दुर्ग के वन मंडल राजनांदगांव एवं अधिनस्थ वन परिक्षेत्रों में फैले भ्रष्टाचार का है जिसमें  विभिन्न मदो के तहत होने वाले कार्यों में हुए करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार और आय से अधिक अर्जीत की गई संपत्ति के लिए जांच समिति गठित हुई थी,गठन के बाद जांच समिति में भी अज्ञात कारणों से फेरबदल की कोशिश की गई  बावजूद इसके वर्तमान परिस्थिति में जांच प्रारंभ हो चुकी है।  जांच में भ्रष्ट कारनामों में आयेंगे चौकाने वाले तथ्य।

 जांच के कुछ बिंदु :-

विभाग द्वारा किस तरह और किन-किन मदों पर खुलकर भ्रष्टाचार किया गया जिसकी बानगी इस तरह हैं-

  1. नरवा विकास योजना के अंतर्गत तालाब निर्माण, चेक डेम, मिट्टी चेक डेम, एनीकट, पडल ट्रेंच, कंटुर ट्रेंच, डबरी निर्माण के आधे-अधूरे कार्य के बावजूद भुगतान पूरा कर दिया है, उच्च अधिकारियों द्वारा जो निर्माण पूर्व में हो चुके हैं उसे दिखाकर वाहवाही लूटी जाती है। इसी तरह मजदूरों के भुगतान में भी काफी घालमेल दिखाई दे रहा है।
  2. विभागीय एवं कैम्पा मद के तहत होने वाले विभिन्न निर्माण कार्य अधूरे पड़े हुए हैं जिनका भुगतान पूरा कर दिया गया है। इसी तरह एनआर/आर.डी.एफ. कार्यों में सुनियोजित तरीके से रकबा के विरुद्ध 100 गुना अधिक प्राक्कलन तैयार कर उसकी स्वीकृति कराई गई एवं ठेकेदारों को सप्लाई आदेश जारी किया गया, इसमें भी बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार किया गया है। नियम विरुद्ध जाकर बारबेट वायर, फेंसिंग पोल की खरीदी एवं गुणवत्ता विहिन कार्य के माध्यम से भ्रष्टाचार किया गया है।
  3. मजदूरों के भुगतान में मजदूरों की सूची की जांच में मानक दिवस के एक ही दिनांक में कई कार्यों की मजदूरी वसूल किया गया है।
  4. संयुक्त वन प्रबंधन समितियों से मत्स्य पालन, फर्नीचर खरीदी, बोर खनन एवं श्रमिक सुरक्षा सहित अन्य कार्यों में समितियों से कोटेशन के माध्यम से प्रस्ताव पास कराकर करोड़ों रुपये की राशि का आहरण कर भ्रष्टाचार किया गया।
  5. इसी तरह कृष्णकुंज पार्क, आक्सी वन उद्यान राजनांदगांव, टप्पा में निर्माणाधीन उद्यान, नगर निगम क्षेत्र में पौधा रोपण कार्य, वन चेतना केंद्र मनगट्टा में करोड़ों रुपये के कार्य का ठेका अपने चहेतों को प्रदान कर उन्हें लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया।
  6.  ठेकेदारों के द्वारा स्वयं प्राक्कलन तैयार कर दो लाख के कार्यों को दस लाख का कार्य स्वीकृत कराकर वन मंडल कार्यालय का एक वर्ष में तीन बार पेंटिंग कार्य, टाईल्स फिटिंग कार्य तो प्रथम दृष्टया ही लाखों रुपये का भ्रष्टाचार दिखाई देता है।
  7. इसी तरह कार्यालय निरीक्षण कुटीर के सामने गार्डन निर्माण में लैंड स्केपिंग, घास रोपण, सीमेंट चेयर, स्टील रेलिंग, जैसे कार्यों में लाखों का भुगतान किया गया। डीएफओ बंगले में मुरुम पटाई का भुगतान ही लाखों में हुआ है। और तो और निरीक्षण कुटीर की इलेक्ट्रानिक सामग्रियों में बंदरबांट आसानी से दिखाई देता है, जिसमें खरीदी 10 गुना अधिक कीमत पर की गई है। मानचित्र कार्यालय, मीटिंग हाल निर्माण, बड़े अधिकारी की चेम्बर में अनाप शनाप राशि खर्च की गई है।
  8. मनमाने ढंग से कोटेशन कार्य में जो खरीदी की गई है वह स्टोर पंजी में दर्ज ही नहीं कर कार्यादेश से सीधा भुगतान किया गया है। कार्य समय समाप्त होने पर सामग्री एवं मजदूरों के व्हाउचर तैयार किया जाते हैं।  ल पीडी खाते से कोटेशन के माध्यम से सामग्री खरीदी एवं मजदूरी में भुगतान कर होने वाले भ्रष्टाचार को काले  से सफेद  किया जाता गया है। ल   सामग्री प्रदाय एवं निर्माण कार्यों हेतु कार्यादेश तो जारी किया जाता है लेकिन बिना किसी कारण के कार्यादेश निरस्त कर दिया जाता है।
  9.  काष्ठागार एवं वनोपज की कूप कटाई एवं चट्टा लगाने के कार्य तथा लैंटाना एवं छिंद उन्मूलन के भुगतान में भी भारी भ्रष्टाचार किया गया है।

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